■ नई रिसर्च ने जगाई उम्मीद

● नई दिल्ली
भारत समेत पूरी दुनिया में हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस बीमारी को नियंत्रित रखने के लिए अधिकांश लोगों को रोज़ाना दवाइयों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में एक नई वैज्ञानिक शोध ने उपचार की दिशा में उम्मीद की किरण जगाई है। शोधकर्ताओं का दावा है कि भविष्य में साल में केवल दो इंजेक्शन लगवाकर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखा जा सकेगा।
यह नई थेरेपी आरएनए तकनीक पर आधारित है। अध्ययन के अनुसार, यह इंजेक्शन शरीर में ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले हार्मोन एंजियोटेंसिन के निर्माण को कम करने का काम करता है। शोध में बताया गया है कि यह दवा उस प्रोटीन को अवरुद्ध करती है, जो उच्च रक्तचाप की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है। इस संबंध में निष्कर्ष प्रतिष्ठित संस्थाओं जैसे American Heart Association और मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित किए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका उन मरीजों के लिए उपयोगी हो सकता है जो रोज़ दवा लेने से बचना चाहते हैं या नियमित दवा लेना भूल जाते हैं। हालांकि, अभी यह उपचार पूरी तरह उपलब्ध नहीं है। फिलहाल इसके क्लीनिकल ट्रायल ही पूरे हुए हैं और व्यापक स्तर पर अनुसंधान जारी है। बड़े पैमाने पर परीक्षण के बाद ही इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा को अंतिम रूप से प्रमाणित किया जा सकेगा।
प्रारंभिक परीक्षणों में इंजेक्शन सुरक्षित पाए गए हैं, पर अंतिम मंजूरी में समय लग सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन World Health Organization के अनुसार, दुनिया भर में 1.4 अरब से अधिक लोग हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं और लगभग 44 प्रतिशत लोगों को अपनी बीमारी की जानकारी तक नहीं होती। कई बार यह समस्या किसी अन्य रोग के उपचार के दौरान सामने आती है।
यदि यह शोध सफल होता है तो मरीजों को रोज़ दवा लेने की आवश्यकता नहीं रहेगी, रक्तचाप नियंत्रित रखने में सुविधा होगी और स्ट्रोक तथा हृदय रोग जैसी गंभीर जटिलताओं के जोखिम को भी कम किया जा सकेगा।
