■ एआई को लेकर विनोद खोसला की बड़ी भविष्यवाणी

● नई दिल्ली
राजधानी में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के मंच से सिलिकॉन वैली के दिग्गज उद्यमी विनोद खोसला ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को लेकर बेहद साहसिक दावा किया है। उनका कहना है कि एआई की तीव्र प्रगति आने वाले वर्षों में आईटी सर्विसेज और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) उद्योग की बुनियाद को ही बदल देगी।
खोसला के अनुसार, 2030 तक पारंपरिक आईटी सेवाओं और कॉल सेंटर आधारित बीपीओ मॉडल का अस्तित्व लगभग समाप्त हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में अभी भी एआई के प्रभाव को कम करके आंका जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि तकनीकी परिवर्तन पारंपरिक नौकरियों को सीधे प्रभावित करेगा। उनका आकलन है कि मौजूदा आउटसोर्सिंग ढांचा अगले पांच वर्षों में तेजी से अप्रासंगिक हो जाएगा।
समिट में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि 2050 तक कार्य और रोजगार की परिभाषा ही बदल जाएगी और संभव है कि पारंपरिक अर्थों में नौकरियों की आवश्यकता न रहे।
पुणे में जन्मे और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से शिक्षा प्राप्त खोसला, खोसला वेंचर्स के संस्थापक हैं और सन माइक्रोसिस्टम्स के सह-संस्थापक के रूप में भी वैश्विक पहचान रखते हैं। अमेरिका में बसे इस भारतीय मूल के अरबपति निवेशक को टेक्नोलॉजी जगत में दूरदर्शी विचारों के लिए जाना जाता है।
हालांकि उन्होंने एआई के कारण संभावित व्यवधान की चेतावनी दी, साथ ही भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में हो रहे प्रयासों की सराहना भी की। उनके इस बयान ने आईटी उद्योग और रोजगार के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
