■ चेन वाले मग हटेंगे, यात्रियों की शिकायतों पर कार्रवाई

● नई दिल्ली
रेल यात्रियों की सुविधा और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए रेल मंत्रालय ने ट्रेनों के शौचालयों में एक अहम बदलाव का निर्णय लिया है। अब टॉयलेट के फर्श के पास लगे पारंपरिक पानी के नल और चेन से बंधे स्टेनलेस स्टील के मग हटाए जाएंगे। उनकी जगह आधुनिक जेट स्प्रे लगाए जाएंगे।
यह निर्णय उत्तर रेलवे में किए गए सफल परीक्षण के बाद लिया गया है। मंत्रालय का मानना है कि इससे शौचालयों में पानी जमा होने की समस्या कम होगी और साफ-सफाई के स्तर में सुधार आएगा।
मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि फर्श पर पानी जमा रहने से गंदगी फैलती है और यात्रियों की ओर से लगातार असंतोष व्यक्त किया जाता रहा है। समय के साथ कोचों के शौचालयों का फर्श असमतल हो जाता है, जिससे छोटे-छोटे गड्ढों में पानी ठहर जाता है। इससे बदबू और अस्वच्छता की स्थिति बनती है।
उत्तर रेलवे के दिल्ली और अंबाला मंडलों ने शताब्दी एक्सप्रेस के कोचों में इस नई व्यवस्था का परीक्षण किया। इस दौरान फर्श के पास लगे नलों को डमी प्लग से बंद किया गया और चेन वाले स्टील मग हटा दिए गए। उनकी जगह हेल्थ फॉसेट यानी जेट स्प्रे व्यवस्थित रूप से स्थापित किए गए।
परीक्षण के परिणाम उत्साहजनक रहे। शौचालयों का फर्श अपेक्षाकृत अधिक सूखा और साफ पाया गया। पानी जमा होने की शिकायतों में भी कमी दर्ज की गई। इसी अनुभव के आधार पर मंत्रालय ने सभी रेलवे जोनों को निर्देश दिया है कि वे अपनी चुनी हुई दस ट्रेनों के एसी कोचों में इसे पायलट परियोजना के रूप में लागू करें।
मंत्रालय ने तीन महीने के परीक्षण के बाद विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट और प्रदर्शन संबंधी फीडबैक भी मांगा है, ताकि भविष्य में इसे व्यापक स्तर पर लागू करने पर निर्णय लिया जा सके।
गौरतलब है कि उत्तर रेलवे ने मंत्रालय को सूचित किया था कि 182 शताब्दी कोचों में पहले ही जेट स्प्रे लगाए जा चुके हैं और वहां फर्श के पास के नल तथा चेन वाले मग हटा दिए गए हैं।
हालांकि, सफाई और रखरखाव से जुड़े हाउसकीपिंग कर्मियों का कहना है कि यह पहल स्वागतयोग्य है, परंतु व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए जेट स्प्रे की नियमित जांच, समय पर मरम्मत और खराब उपकरणों का शीघ्र प्रतिस्थापन भी उतना ही आवश्यक है।
रेल मंत्रालय का यह कदम स्वच्छ और सुविधाजनक रेल यात्रा की दिशा में एक व्यावहारिक प्रयास माना जा रहा है, जिसका सीधा लाभ यात्रियों को मिलने की उम्मीद है।
