■ सूर्यबाला जी का आत्मकथ्य और नाटक प्रस्तुति

● मुंबई
रविवार, 8 मार्च 2026 को केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट, गोरेगांव के मृणालताई हॉल में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक विशेष समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में प्रख्यात साहित्यकार सूर्यबाला जी ने अपना आत्मकथ्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा वही लिखा, जो उनके मन ने कहा, और नए लेखकों को भी अपने मन की बात को ही लेखन का आधार बनाना चाहिए।
सूर्यबाला जी ने अपने बचपन की स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि उनके पिताजी का देहांत बहुत जल्दी हो गया था, जिससे उनका बचपन काफी कठिनाइयों में बीता। उन्होंने कहा कि लेखन उनके लिए दुखों से उबरने की शरणस्थली बन गया। अपने पात्रों के दुख को लिखने से पहले वे स्वयं उन भावनाओं से गुजरती थीं। ‘सारिका’ पत्रिका के संपादक कमलेश्वर के सुझाव पर उन्होंने अपनी पहली कहानी ‘जीजी’ लिखी, जो ‘सारिका’ में प्रकाशित हुई।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुंबई की महिला रचनाकारों के सवालों का जवाब देते हुए सूर्यबाला जी ने कहा कि लेखन अक्सर बेख़ुदी की अवस्था में होता है, जिसमें संवेदनाएं और भावनाएं स्वतः शामिल हो जाती हैं। उनके अनुसार, एक लेखक के भीतर सच्चाई का होना बेहद जरूरी है, तभी वह प्रभावी ढंग से लिख पाता है। उन्होंने कहा कि कहानी लिखना एक प्रकार की प्रतिक्रिया है—हमारे भीतर जो विचार और भावनाएं उमड़ती रहती हैं, वही कहानी के रूप में सामने आती हैं।
उन्होंने बताया कि ‘वेणु की डायरी’ के वेणु और ‘मेरे संधि पत्र’ के रत्नेश उनके प्रिय पात्र हैं। उनका मानना है कि लेखन मनुष्य की शाश्वत अनुभूतियों पर आधारित होता है और वे भी अपने भीतर की दुनिया से प्रेरणा लेकर लिखती हैं।
कार्यक्रम में सूर्यबाला जी ने अपनी व्यंग्य रचना ‘महिला दिवस और फ्रेंच टोस्ट’ का पाठ भी किया। इस व्यंग्य को दर्शकों ने खूब सराहा। सभागार तालियों और ठहाकों से गूंज उठा।

कार्यक्रम के अंत में कथाकार सूरज प्रकाश ने सूर्यबाला जी के लेखन की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए सभी को महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं।
इसके बाद लता हया और अर्चना जौहरी के लघु नाटक ‘इतनी सी बात’ की प्रस्तुति हुई। नाटक में राजस्थानी जेठानी और उत्तर प्रदेश की देवरानी की रोचक नोंक-झोंक को दर्शकों ने खूब पसंद किया। नाटक की प्रस्तावना मधुबाला शुक्ल ने प्रस्तुत की।
प्रसिद्ध अभिनेता राजेंद्र गुप्ता ने दोनों अभिनेत्रियों के सहज और प्रभावशाली अभिनय की सराहना की। कथाकार सूर्यबाला ने भी अभिनय के साथ-साथ नाटक के चुटीले संवादों की प्रशंसा की।
चित्र नगरी संवाद मंच की ओर से देवमणि पांडेय के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख श्रोताओं में रचनाशंकर, पारमिता षड़ंगी, उषा साहू, सोनाली बोस, प्रज्ञा मिश्र, प्रतिमा सिन्हा, सविता मनचंदा, गुलशन मदान, नवीन चतुर्वेदी, अभिनेता राजेंद्र गुप्ता, प्रदीप गुप्ता और कृष्णा गौतम सहित अनेक साहित्यप्रेमी शामिल थे।
