■ डीजी की अगुवाई में बनेगी विशेष समिति

● मुंबई
महाराष्ट्र में सोशल मीडिया के जरिए फैल रही बदनामी और फर्जी खातों के बढ़ते मामलों को लेकर राज्य सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में घोषणा की कि इस समस्या की जांच के लिए पुलिस महासंचालक (डीजी) के नेतृत्व में एक विशेष समिति गठित की जाएगी। यह समिति अध्ययन करेगी कि मौजूदा कानूनों में संशोधन पर्याप्त होगा या फिर इस विषय पर नया कानून बनाने की आवश्यकता है।
विधानसभा में भाजपा विधायक राहुल कूल ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर सुनियोजित तरीके से बदनामी करने के लिए फर्जी खाते बनाए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस व्यवस्था की जाएगी।
इस पर गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने बताया कि डिजिटल युग में अपराध का स्वरूप बदल रहा है। पहले जहां डकैती जैसी घटनाएं अधिक होती थीं, वहीं अब साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में साइबर सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध कराई गई है, जिसे एशिया में सर्वश्रेष्ठ में गिना जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया पर बिना प्रमाण के की जाने वाली बदनामी समाज के विभिन्न वर्गों को प्रभावित कर रही है, खासकर महिलाओं को। इसलिए इस विषय पर गंभीरता से अध्ययन कर ठोस कानूनी व्यवस्था बनाने की जरूरत है।
इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने भी सुझाव दिया कि पहले आईटी एक्ट की धारा 66ए के तहत सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने पर गिरफ्तारी का प्रावधान था, जिसे बाद में समाप्त कर दिया गया। बढ़ते मामलों को देखते हुए इस तरह के प्रावधानों पर फिर से विचार किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के कारण पुराने प्रावधान प्रभावी नहीं रह गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार आवश्यकतानुसार नया कानून या संशोधन लाकर सोशल मीडिया पर फैल रही बदनामी को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार करेगी।
