
● कोलंबो
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए श्रीलंका ने बड़ा कदम उठाते हुए हर बुधवार को सरकारी संस्थानों में साप्ताहिक अवकाश घोषित कर दिया है। इस फैसले के साथ ही देश में अब सप्ताह में केवल चार दिन कामकाज होगा।
सरकार का यह निर्णय ईंधन संकट की संभावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को अस्थिर कर दिया है। इसी पृष्ठभूमि में आयोजित आपात बैठक में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा कि देश को सबसे खराब परिस्थितियों के लिए तैयार रहना होगा, हालांकि बेहतर हालात की उम्मीद भी बनाए रखनी चाहिए।
दरअसल, संकट की जड़ होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाएं हैं। ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर एशियाई देशों पर पड़ता है, जो बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात पर निर्भर हैं।
श्रीलंका का ताजा फैसला इसी व्यापक संकट की आहट का संकेत है, जिसकी गूंज भारत सहित पूरे एशिया में सुनाई दे रही है।
