■ 340 किमी जलमार्ग नेटवर्क का खाका तैयार

● मुंबई
महानगर क्षेत्र में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने और वैकल्पिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने महत्वाकांक्षी वॉटर मेट्रो परियोजना को तीन चरणों में लागू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से आगे बढ़ाया जाए।
विधानभवन में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने जल परिवहन के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचे को शीघ्र विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने शिपयार्ड के लिए जल्द जमीन चिन्हित करने के निर्देश दिए, ताकि स्थानीय स्तर पर नावों और जहाजों का निर्माण संभव हो सके और परियोजना की गति तेज हो।
सरकार की रूपरेखा के अनुसार, मुंबई महानगर क्षेत्र में 11 नए जलमार्ग, 24 आधुनिक टर्मिनल और लगभग 215 किलोमीटर का नया नेटवर्क विकसित किया जाएगा। साथ ही 21 मौजूदा जलमार्गों और 20 टर्मिनलों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इन सभी प्रयासों के बाद कुल जल परिवहन नेटवर्क 340 किलोमीटर तक विस्तारित हो जाएगा।
परियोजना का लक्ष्य वर्ष 2031 तक करीब 7.5 करोड़ यात्रियों को जल परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए 3,436 करोड़ रुपये की समुद्री आधारभूत संरचना विकसित की जाएगी और 207 इलेक्ट्रिक व हाइब्रिड नौकाओं को शामिल किया जाएगा, जिससे यह परियोजना पर्यावरण के अनुकूल भी बनी रहे।
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित इस योजना के पहले चरण में लगभग 1,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही नांदगांव, दिघी और विजयदुर्ग में शिपयार्ड विकसित करने तथा ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर स्थापित करने की भी योजना है।
सरकार का मानना है कि वॉटर मेट्रो परियोजना न केवल मुंबई की ट्रैफिक समस्या को कम करने में कारगर साबित होगी, बल्कि शहर को एक आधुनिक, टिकाऊ और स्मार्ट परिवहन प्रणाली की दिशा में भी मजबूत कदम देगी।
