
● नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के संसद से पारित न हो पाने पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने इसे केवल एक विधेयक की असफलता नहीं बल्कि देश की महिलाओं की आकांक्षाओं को ठेस पहुंचाने वाला घटनाक्रम बताया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भावुक स्वर अपनाते हुए कहा कि वे देश की माताओं, बहनों और बेटियों से सीधे संवाद करने आए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे देश ने देखा कि किस तरह नारी शक्ति की प्रगति को थाम दिया गया और उनके सपनों को आघात पहुंचा। उन्होंने स्वीकार किया कि तमाम प्रयासों के बावजूद विधेयक पारित नहीं हो सका और इसके लिए महिलाओं से क्षमा भी मांगी।
संसद में विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सम्मान सर्वोपरि है और सदन में जो घटनाक्रम हुआ, उसकी पीड़ा लंबे समय तक महसूस की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन दलों ने इस विधेयक का विरोध किया, वे महिलाओं के अधिकारों को लेकर गंभीर नहीं हैं।
प्रधानमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि आज की जागरूक महिलाएं हर राजनीतिक निर्णय को समझ रही हैं और समय आने पर अपना निर्णय देंगी। उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण का विरोध संविधान निर्माताओं की भावना के विपरीत है।
इस दौरान कांग्रेस, सपा, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस सहित कई दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से तकनीकी कारणों का हवाला देकर महिला आरक्षण को टाला जाता रहा है।
गौरतलब है कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव रखता है। इसे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
