■ हाईकोर्ट की फटकार, प्रशासन कटघरे में

● मुंबई
मुंबई के फुटपाथों पर बढ़ते अतिक्रमण ने एक बार फिर शहर की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हालिया सुनवाई में पुलिस और बीएमसी की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए पूछा कि जब फुटपाथ ही अतिक्रमण की गिरफ्त में हों, तो आम नागरिक आखिर चलें कहां।
अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्षों से दिए जा रहे निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, जो प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी की ओर इशारा करती है।
दरअसल, यह समस्या नई नहीं है। पिछले चार दशकों से मुंबई अतिक्रमण की इस चुनौती से जूझ रही है। समय-समय पर अभियान चलाए गए, मगर उनका असर अस्थायी ही रहा। कुछ दिनों की सख्ती के बाद हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं, जिससे पैदल चलने वालों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि हॉकर्स को पूरी तरह हटाना व्यावहारिक समाधान नहीं है, क्योंकि यह लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा मुद्दा है और शहर की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में संतुलित और नियोजित व्यवस्था ही इस समस्या का स्थायी हल हो सकती है, जहां नियमों का पालन भी हो और रोज़गार भी सुरक्षित रहे।
