■ नाइट फ्रैंक की ‘वेल्थ रिपोर्ट 2026‘

● मुंबई
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई अब केवल कारोबार की नगरी नहीं रही, बल्कि देश के सबसे बड़े धन-संचय केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर चुकी है। नाइट फ्रैंक की ‘वेल्थ रिपोर्ट 2026’ के अनुसार, भारत के कुल अल्ट्रा-हाई नेटवर्थ व्यक्तियों (UHNWIs) में 35.4 प्रतिशत मुंबई में निवास करते हैं।
रिपोर्ट बताती है कि 30 मिलियन डॉलर (करीब 250 करोड़ रुपये) से अधिक संपत्ति रखने वाले लोगों की संख्या में तेज़ इजाफा हुआ है। वर्ष 2021 से 2026 के बीच इस वर्ग में 63 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे इनकी संख्या बढ़कर 19,877 तक पहुंच गई है। अनुमान है कि 2031 तक यह आंकड़ा 25,000 के पार जा सकता है।
इस बढ़ती समृद्धि का सबसे स्पष्ट प्रभाव रियल एस्टेट क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। मुंबई में लग्जरी और अल्ट्रा-लग्जरी आवासों की मांग निरंतर बढ़ रही है। वर्ष 2025 में ही 5 मिलियन डॉलर से अधिक कीमत वाले 56 घरों की बिक्री इसका प्रमाण हैं। अब यह रुझान केवल निवेश तक सीमित नहीं, बल्कि उच्च जीवन-स्तर की चाह से भी प्रेरित है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि सीमित भूमि और चारों ओर समुद्र से घिरे होने के कारण मुंबई में संपत्ति की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है। वर्ष 2025 में प्राइम प्रॉपर्टी के दाम 8.7 प्रतिशत बढ़े, जिससे वैश्विक रैंकिंग में मुंबई 21वें स्थान से उछलकर 10वें स्थान पर पहुंच गया। हालांकि, मोनाको और हांगकांग जैसे शहरों की तुलना में मुंबई अभी भी अपेक्षाकृत किफायती मानी जाती है, जहां 1 मिलियन डॉलर में लगभग 96 वर्ग मीटर जगह उपलब्ध है।
समग्र रूप से देखें तो मुंबई में बढ़ती संपन्नता और विलासितापूर्ण जीवनशैली की मांग यह संकेत देती है कि भारत में धन सृजन का केंद्र और अधिक सुदृढ़ होता जा रहा है।
