▪️ सूर्यकांत उपाध्याय

बहुत समय पहले की बात है। मोइराऊ गणराज्य का राजा बूढ़ा हो चला था। वहाँ राजा चुनने की प्रथा भी अनूठी थी। नगर के समझदार लोग गाँव-गाँव घूमते और जिसे वे अपने से भी अधिक चतुर तथा सूझ-बूझ वाला समझते, उसी को राजा चुन लेते थे। गणराज्य को शीघ्र ही नए राजा की आवश्यकता थी, इसलिए उसकी तलाश शुरू की गई।
काकचिड़ गाँव में तोमना नाम का एक किसान रहता था। वह बहुत चतुर था। सभी उसकी बुद्धि और योग्यता का लोहा मानते थे। शाम होते ही गाँव के किसान उसकी बैठक में आ बैठते। तोमना उन्हें देश-विदेश की रोचक कथाएँ सुनाया करता था।
घूमते-घूमते चुनाव दल तोमना के गाँव में आ पहुँचा। उन्होंने लोगों से पूछा, ‘भई, तुम्हारे गाँव में सबसे बुद्धिमान व्यक्ति कौन है?’
गाँव के सबसे छोटे बच्चे ने तुतलाते हुए कहा, ‘क्यों, तुम तोमना को नहीं जानते?’
चुनाव दल हँस पड़ा। उन्होंने सोचा कि अवश्य ही तोमना किसी पागल का नाम होगा। खैर, किसी तरह वे तोमना तक पहुँचे। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के उससे पूछा, ‘किसान भैया, भोजन के बाद हम नमक क्यों परोसते हैं?’
तोमना ने काम करते-करते उत्तर दिया, ‘हमारी यही रीति है। इससे लाभ यह होता है कि नमक भोजन को शीघ्र पचा देता है, जिससे हमारा हाजमा ठीक रहता है।’
फिर तोमना ने लय में गाना शुरू किया—
हाजमा ठीक रहे तो
काम ज्यादा होगा।
मेहनत ज्यादा होगी तो
फसल अच्छी होगी।
मुनाफा अच्छा आएगा तो
लोग खुशहाल होंगे।
लोग खुशहाल होंगे तो
देश तरक्की करेगा।
देश तरक्की करेगा तो
राजा प्रशंसा पाएगा।
चुनाव दल तोमना की वाकपटुता पर मुग्ध हो उठा। उन्होंने अपना वास्तविक परिचय छिपाकर उससे मित्रता कर ली। दोपहर को खेत में सब गप्पें लड़ाने लगे। उनमें से एक बोला, ‘मेरे दादा जी के घर का आँगन इतना बड़ा था कि एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए टट्टू की सवारी करनी पड़ती थी।’
दूसरे ने इससे भी बड़ी बात कह दी। वह बोला, ‘मेरे नाना जी का बैल इतना बड़ा था कि उसकी पूँछ को वे रस्सी की तरह इस्तेमाल करते थे।’
तीसरा व्यक्ति भी कम न था। उसने कहा, ‘मेरी सास के घर ऐसा छायादार वृक्ष है, जिसके नीचे पूरा गाँव आराम कर सकता है।’
अब बारी तोमना की थी। उसने तंबाकू मलते-मलते कहा, ‘हमारे पिता जी का ढोल इतना बड़ा था कि उसकी थाप पूरे नगर में गूँजती थी।’
बस, चुनाव दल को उसकी बात काटने का अवसर मिल गया। वे हाथ नचाते हुए बोले, ‘ऐसा तो हो ही नहीं सकता। इतना बड़ा ढोल तुम्हारे पिता जी ने कहाँ रखा और कैसे बनवाया?’
तोमना मुस्कुराया और बोला, ‘अरे भले लोगो! वह ढोल मेरे दादा जी के आँगन में रखा था। उसे मेरे नाना जी के बैल के चमड़े से मढ़ा गया था और मेरी सास के घर के पेड़ की लकड़ी से बनाया गया था।’
उसकी बात सुनते ही चुनाव दल ने एक भी क्षण गँवाए बिना बुद्धिमान तोमना को फूलों की माला पहना दी। उन्होंने अपना भावी राजा चुन लिया था।
तोमना से अधिक बुद्धिमान, वाकपटु और हाजिरजवाब राजा उन्हें और कहाँ मिलता!
