
- मुंबई
देश में कमजोर पड़ते मानसून ने केवल किसानों ही नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। सामान्य से लगभग 43 प्रतिशत कम वर्षा के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन, खाद्य वस्तुओं की कीमतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की लगभग आधी कृषि भूमि अब भी वर्षा पर निर्भर है। ऐसे में यदि जुलाई और अगस्त में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो धान, दालें, तिलहन और अन्य खरीफ फसलों का उत्पादन घट सकता है। इससे खाद्य महंगाई बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की आय और उपभोग क्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्षा की कमी से प्रभावित 300 से अधिक जिलों के लिए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की है। राज्यों को कम पानी में होने वाली फसलों को बढ़ावा देने, जल संरक्षण के उपाय तेज करने तथा सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य नहीं रहा, तो खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार संभावित नुकसान को कुछ हद तक कम कर सकता है। इसके बावजूद मानसून की आगामी प्रगति पर सरकार, किसान और बाजार सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
