
▪️ मुंबई
महाराष्ट्र सरकार ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के नियमों में प्रस्तावित विवादित संशोधनों को फिलहाल स्थगित कर दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हस्तक्षेप के बाद राज्य सूचना आयोग ने 12 जून को जारी संशोधित नियमों पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
दरअसल, वरिष्ठ समाजसेवी अण्णा हजारे ने इन संशोधनों का कड़ा विरोध करते हुए चेतावनी दी थी कि यदि इन्हें वापस नहीं लिया गया तो वे आंदोलन शुरू करेंगे। उनके विरोध को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त को पत्र लिखकर प्रस्तावित नियमों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था।
मुख्यमंत्री के पत्र के बाद मुख्य सूचना आयुक्त ने संशोधित नियमों को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया। इस निर्णय का आरटीआई कार्यकर्ताओं और पारदर्शिता के पक्ष में काम करने वाले संगठनों ने स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे आम नागरिकों के सूचना पाने के अधिकार की रक्षा हुई है।
प्रस्तावित संशोधनों में आरटीआई आवेदन शुल्क 10 रुपए से बढ़ाकर 30 रुपए करना, प्रति पृष्ठ प्रतिलिपि शुल्क 2 रुपए से बढ़ाकर 5 रुपए करना तथा प्रथम और द्वितीय अपील पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव था। साथ ही, एक आवेदन में केवल एक विषय रखने, आवेदन को 150 शब्दों तक सीमित करने और पहचान पत्र संलग्न करना अनिवार्य करने जैसे प्रावधान भी शामिल थे।
इन प्रस्तावों को लेकर आशंका जताई जा रही थी कि इससे आम लोगों के लिए सूचना प्राप्त करना अधिक कठिन और महंगा हो जाएगा।
