▪️महाराष्ट्र सरकार से दो सप्ताह में मांगा स्पष्ट जवाब

- मुंबई
आगामी गणेशोत्सव को देखते हुए प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की गणेश मूर्तियों पर प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से स्पष्ट और ठोस रुख पेश करने को कहा है। अदालत ने निर्देश दिया कि पीओपी के पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) की संभावनाओं पर विशेषज्ञ समिति से विचार-विमर्श कर सरकार दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करे।
न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से सवाल किया कि क्या इस वर्ष गणेशोत्सव में पीओपी की मूर्तियों पर लगाया गया प्रतिबंध पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाएगा।
यह मामला पीओपी मूर्तियों से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सामने आया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने वर्ष 2020 की अपनी पूर्व नीति में संशोधन किया था, जिसके आधार पर महाराष्ट्र सरकार ने 1 अगस्त 2025 को नई नीति लागू की। इस संशोधित नीति को पर्यावरण कार्यकर्ताओं तथा शाडू मिट्टी के मूर्तिकारों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने अदालत को बताया कि उपयोग के बाद पीओपी का पुनर्चक्रण व्यावहारिक और प्रभावी है या नहीं, इसका अध्ययन विशेषज्ञ समिति कर रही है। समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार इस विषय पर उचित निर्णय लेकर अपना स्पष्ट रुख अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
