
▪️ नागपुर
अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संघ की कार्यप्रणाली को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अक्सर यह भ्रम फैलाया जाता है कि संघ से प्रेरित सभी संगठन सीधे आरएसएस के नियंत्रण में काम करते हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।
नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि संघ किसी भी सहयोगी या प्रेरित संगठन को निर्देश देकर नहीं चलाता। प्रत्येक संगठन अपने संविधान, कार्यप्रणाली और नेतृत्व के अनुसार स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने और काम करने के लिए स्वायत्त है। संघ का संबंध केवल वैचारिक प्रेरणा और सामाजिक मूल्यों तक सीमित है।
उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य समाज में ऐसे स्वयंसेवकों का निर्माण करना है, जो विभिन्न क्षेत्रों में जाकर राष्ट्रहित और समाजसेवा की भावना के साथ कार्य करें। संघ व्यक्ति निर्माण पर विश्वास करता है, न कि संस्थाओं को नियंत्रित करने पर। यही कारण है कि विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत अनेक संगठन अपनी स्वतंत्र पहचान और कार्यशैली के साथ आगे बढ़ते हैं।
भागवत ने यह भी कहा कि देश ही नहीं, विदेशों से भी लोग संघ के कार्यों और संगठनात्मक पद्धति को समझने आते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि संघ के बारे में बनी पूर्वधारणाओं और भ्रांतियों के बजाय उसके वास्तविक कार्य और विचार को समझने का प्रयास किया जाना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर संघ और उससे जुड़े संगठनों को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं चल रही हैं। इसी बीच संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने अलग से जारी बयान में कहा है कि इस घटना से करोड़ों रामभक्तों की आस्था को गहरी ठेस पहुंची है और जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
