
▪️अयोध्या
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन व्यवस्था को अधिक अनुशासित और गरिमापूर्ण बनाने के उद्देश्य से ड्रेस कोड लागू करने की तैयारी की जा रही है। हाल ही में दानपात्र से धन चोरी की घटना के बाद मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और अनुशासन से जुड़े कई नए कदमों पर विचार शुरू किया है। इन्हीं प्रस्तावों में श्रद्धालुओं के लिए शालीन और मर्यादित वस्त्र पहनने की व्यवस्था भी शामिल है।
मंदिर प्रशासन का मानना है कि मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति के केंद्र हैं। इसलिए यहां आने वाले श्रद्धालुओं का पहनावा भी मंदिर की गरिमा के अनुरूप होना चाहिए। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय ट्रस्ट द्वारा औपचारिक रूप से लिया जाएगा।
देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों में पहले से ही ड्रेस कोड लागू है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर में पुरुषों के लिए धोती या पायजामा-कुर्ता तथा महिलाओं के लिए साड़ी, सलवार-कमीज़ या अन्य पारंपरिक भारतीय परिधान पहनने की सलाह दी जाती है। ओडिशा के जगन्नाथ पुरी मंदिर में भी श्रद्धालुओं से शालीन और पारंपरिक वस्त्र पहनकर आने का आग्रह किया जाता है।
केरल के कई प्रमुख मंदिरों में नियम और अधिक सख्त हैं। गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर तथा पद्मनाभस्वामी मंदिर में पुरुषों को धोती या मुंडु पहनकर प्रवेश करना होता है। कई स्थानों पर शर्ट या टी-शर्ट पहनकर गर्भगृह के निकट जाने की अनुमति नहीं होती। महिलाओं के लिए भी साड़ी, सेट-मुंडु या अन्य पारंपरिक भारतीय परिधान को प्राथमिकता दी जाती है।
मंदिरों में ड्रेस कोड का उद्देश्य किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता सीमित करना नहीं, बल्कि धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक मर्यादाओं और आध्यात्मिक वातावरण का सम्मान बनाए रखना है। यदि अयोध्या राम मंदिर में भी यह व्यवस्था लागू होती है, तो वह देश के उन प्रमुख तीर्थस्थलों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां श्रद्धालुओं के पहनावे के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश पहले से लागू हैं।
