
▪️ मुंबई
महाराष्ट्र में बोतलबंद पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अन्न एवं औषध प्रशासन (एफडीए) ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। अन्न एवं औषध प्रशासन मंत्री नरहरि झिरवल के निर्देश पर एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे राज्यभर में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर के उत्पादन और बिक्री के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार करेंगे। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और शुद्ध पेयजल पहुंचाना तथा नकली और घटिया गुणवत्ता वाले पानी के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाना है।
हाल के महीनों में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से बिना मानकों का पालन किए तैयार किए जा रहे पैकेज्ड पानी की शिकायतें लगातार सामने आई हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कई छोटे उत्पादन केंद्र आवश्यक गुणवत्ता मानकों की अनदेखी कर पानी को बोतलों में भरकर बाजार में बेच रहे हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
नई एसओपी के तहत पानी के स्रोत की अनिवार्य जांच, वैज्ञानिक तरीके से शुद्धिकरण, नियमित प्रयोगशाला परीक्षण, पैकेजिंग और लेबलिंग के लिए कड़े मानक तय किए जाएंगे। इन नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माताओं और विक्रेताओं के खिलाफ भारी जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या रद्द करने सहित सख्त कार्रवाई की जाएगी। एफडीए का मानना है कि इस व्यवस्था से राज्य में बोतलबंद पेयजल की गुणवत्ता पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा और उपभोक्ताओं का भरोसा भी मजबूत होगा।
