▪️हजार साल से संजोए हुए है भारतीय संस्कृति की विरासत

• नई दिल्ली
इंडोनेशिया के मध्य जावा प्रांत में स्थित प्रम्बानन मंदिर केवल एक प्राचीन धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक संबंधों का जीवंत प्रतीक है। करीब एक हजार वर्ष पहले निर्मित यह भव्य हिंदू मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला, ऊंचे शिखरों और दीवारों पर उकेरी गई रामायण की मनमोहक कथाओं के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के बाद यह मंदिर एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
प्रम्बानन दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है। इसका निर्माण 9वीं शताब्दी में संजय वंश के शासनकाल में हुआ था। मंदिर परिसर भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित है, जिनमें भगवान शिव का मुख्य मंदिर लगभग 47 मीटर ऊंचा है। इसकी वास्तुकला भारतीय शैव परंपरा से प्रेरित मानी जाती है।

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दीवारों पर उकेरी गई रामायण की विस्तृत शिल्पकथाएं हैं। श्रद्धालु और पर्यटक मंदिर की परिक्रमा करते हुए इन नक्काशियों के माध्यम से श्रीराम के जीवन की पूरी कथा का दर्शन कर सकते हैं। यही नहीं, आज भी मंदिर परिसर में खुले मंच पर ‘रामायण बैले’ का नियमित मंचन होता है, जिसमें नृत्य, संगीत और नाटक के जरिए रामकथा को जीवंत किया जाता है।
साल 1991 में इस मंदिर को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। ज्वालामुखी विस्फोटों, भूकंपों और समय की मार झेलने के बावजूद प्रम्बानन आज भी अपनी भव्यता के साथ खड़ा है। यह मंदिर न केवल हिंदू आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला और रामायण की वैश्विक विरासत का भी अनमोल प्रतीक माना जाता है।
