
▪️मुंबई
एल नीनो के कारण इस वर्ष मानसून कमजोर रहने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में हुई रिकॉर्ड बारिश ने मौसम वैज्ञानिकों के अनुमान को चुनौती दे दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब मानसून का स्वरूप बदल रहा है और इसके पीछे जलवायु परिवर्तन तथा हिंद महासागर द्विध्रुव (इंडियन ओशन डाइपोल-IOD) की महत्वपूर्ण भूमिका है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, जुलाई के पहले सप्ताह में ही मुंबई के कुलाबा वेधशाला में पूरे महीने की औसत वर्षा से अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि सांताक्रूज़ वेधशाला भी मासिक औसत के करीब पहुंच गई। इससे स्पष्ट है कि अब लंबे समय तक सामान्य बारिश के बजाय कम समय में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, एल नीनो सामान्यतः मानसून को कमजोर करता है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के कारण वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ गई है। गर्म हवा अधिक जलवाष्प धारण करती है, जिससे बादलों में अत्यधिक नमी जमा होती है और कुछ ही घंटों में मूसलाधार बारिश होने लगती है। इसके अलावा, अरब सागर से लगातार मिल रही नमी और पश्चिमी घाट की भौगोलिक संरचना भी मुंबई में भारी वर्षा को बढ़ावा देती है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस वर्ष सकारात्मक IOD ने एल नीनो के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया। हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से का अधिक तापमान अरब सागर में वाष्पीकरण बढ़ाता है, जिससे मानसूनी हवाओं को अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है और वर्षा की तीव्रता बढ़ जाती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में कम दिनों में अत्यधिक बारिश की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। ऐसे में मुंबई जैसे महानगरों को जल निकासी व्यवस्था, शहरी नियोजन और आपदा प्रबंधन को अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता होगी।
