
▪️मुंबई
मुंबई में 5 से 8 जुलाई के बीच हुई भारी बारिश के बाद सामने आए जलभराव की स्थिति का उपग्रह डेटा के जरिए किया गया विश्लेषण शहर की पुरानी समस्याओं को एक बार फिर उजागर करता है। उच्च-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर उन क्षेत्रों की पहचान की गई, जहां इस दौरान नया पानी जमा हुआ और जिन्हें संभावित जलमग्न क्षेत्र माना गया।
इस विश्लेषण में विक्रोली, पवई, भांडुप, अंधेरी, चकाला, जोगेश्वरी, मालाड और आरे-गोरेगांव के कुछ हिस्सों में बाढ़ के स्पष्ट संकेत दिखाई दिए। ये वही इलाके हैं जो हर साल मानसून के दौरान जलभराव, ट्रैफिक जाम और लोकल ट्रेनों व सड़कों पर आवागमन बाधित होने जैसी समस्याओं से जूझते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति किसी एक बार की नहीं बल्कि लगातार सामने आने वाला पैटर्न है। हर वर्ष भारी बारिश के दौरान इन्हीं क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था चरमराती नजर आती है। इससे न केवल आम नागरिकों को परेशानी होती है, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित होती है।
यह रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती है कि मुंबई में जल निकासी और शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है।
