
▪️ मुंबई
भारत में जहां आय के आधार पर नागरिकों को आयकर (इनकम टैक्स) देना पड़ता है, वहीं सिक्किम एक ऐसा राज्य है, जहां अधिकांश पात्र मूल निवासियों को इस कर से विशेष छूट प्राप्त है। इसकी वजह सिक्किम का ऐतिहासिक और संवैधानिक दर्जा है। वर्ष 1975 में भारत में विलय से पहले सिक्किम एक स्वतंत्र राजशाही था। विलय के बाद राज्य की विशिष्ट पहचान और वहां के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में अनुच्छेद 371(एफ) जोड़ा गया।
इसी संवैधानिक प्रावधान और आयकर अधिनियम की धारा 10(26AAA) के तहत ‘सिक्किमी’ के रूप में मान्यता प्राप्त मूल निवासियों को आयकर से छूट दी गई है। हालांकि यह छूट राज्य में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को स्वतः नहीं मिलती। केवल वे लोग, जिन्हें कानून के अनुसार ‘सिक्किमी’ का दर्जा प्राप्त है, इस लाभ के पात्र हैं। दूसरे राज्यों से आकर सिक्किम में बसने वाले या वहां नौकरी करने वाले लोगों पर सामान्य आयकर नियम ही लागू होते हैं।
सिक्किम की यह कर व्यवस्था भारत के अन्य राज्यों से अलग मानी जाती है। इसका उद्देश्य राज्य की सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक अधिकारों और स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा करना है। समय-समय पर केंद्र सरकार और न्यायालयों ने भी इस विशेष प्रावधान को बरकरार रखा है तथा पात्रता के दायरे में कुछ संशोधन किए हैं, ताकि समानता और न्याय के सिद्धांतों का पालन हो सके।
इस तरह सिक्किम भारत का एकमात्र राज्य है, जहां विशेष संवैधानिक प्रावधानों के कारण पात्र मूल निवासियों को आयकर से छूट प्राप्त है। यह व्यवस्था भारतीय संघीय ढांचे में राज्य की विशिष्ट ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है।
