▪️ सूर्यकांत उपाध्याय

बुराई केवल उसकी ऊपरी काट-छांट से समाप्त नहीं होती, बल्कि उसे जड़ से मिटाना पड़ता है। जब तक उसकी जड़ बनी रहती है, तब तक उसका दुष्प्रभाव भी समाप्त नहीं होता।
एक नगर में एक व्यक्ति रहता था। उसके आँगन में एक पौधा उग आया। समय के साथ वह बड़ा पेड़ बन गया और उस पर फल लगने लगे। एक दिन उसका एक पका हुआ फल नीचे गिरा, जिसे एक कुत्ते ने खा लिया। फल खाते ही कुत्ते की मृत्यु हो गई। उस व्यक्ति ने इसे संयोग समझकर पेड़ पर ध्यान नहीं दिया।
कुछ दिनों बाद एक बालक वहाँ से गुजरा। उसने पेड़ का फल देखा और लालचवश उसे तोड़कर खा लिया। फल खाते ही उसकी भी मृत्यु हो गई। तब उस व्यक्ति को समझ में आया कि यह पेड़ जहरीला है। उसने कुल्हाड़ी से उसके सभी फल काटकर गिरा दिए।
कुछ समय बाद पेड़ पर फिर फल आ गए, बल्कि पहले से भी अधिक। इस बार उसने फलों के साथ उसकी शाखाएँ भी काट दीं, लेकिन कुछ दिनों बाद पेड़ फिर फलों से लद गया। वह बहुत परेशान हो गया।
तभी उसके पड़ोसी ने कारण पूछा। सारी बात सुनने के बाद उसने कहा, ‘तुमने केवल फल और शाखाएँ काटीं, लेकिन पेड़ की जड़ को नहीं हटाया। जब तक जड़ रहेगी, पेड़ फिर उगता रहेगा। यदि इससे हमेशा के लिए छुटकारा पाना है, तो इसकी जड़ काटनी होगी।’
यह बात सुनकर उस व्यक्ति ने पेड़ की जड़ काट दी। इसके बाद वह जहरीले पेड़ और उसकी चिंता से हमेशा के लिए मुक्त हो गया।
▪️ शिक्षा : जीवन में बुराइयों की जड़ हमारे मन में होती है। मन का शुद्धिकरण ही सच्चा समाधान है।
