▪️ 90 मिनट का पहाड़ी सफर अब 10 मिनट में?
- देहरादून। क्या हो अगर पहाड़ों में 90 मिनट का सफर महज 10 मिनट में पूरा किया जा सके? उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी इनोवेटर रवि तम्टा ने इसी सवाल का जवाब तलाशते हुए एक ऐसा इलेक्ट्रिक उड़न वाहन तैयार किया है, जो किसी साइंस-फिक्शन फिल्म के दृश्य जैसा नजर आता है।

अल्मोड़ा के कफलीखान गांव से ताल्लुक रखने वाले रवि तम्टा ने ड्रोन तकनीक में बदलाव कर ‘HAPIDA SKYNeX’ नाम का सिंगल-सीटर मल्टी-रोटर प्रोटोटाइप विकसित किया है। यह वाहन वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग यानी बिना रनवे के सीधे ऊपर उड़ान भरने में सक्षम है और इसमें एक व्यक्ति के बैठने की व्यवस्था है।
तम्टा के मुताबिक, इस तकनीक को विकसित करने की प्रेरणा उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में आने-जाने की मुश्किलों से मिली। पहाड़ी रास्तों पर करीब 40 किलोमीटर की दूरी तय करने में कई बार 90 मिनट तक लग जाते हैं। ऐसे में उन्होंने कम समय में दूरी तय करने वाले वैकल्पिक परिवहन की कल्पना की।
इस प्रोटोटाइप का अल्मोड़ा में शुरुआती परीक्षण भी किया जा चुका है, जिसमें वाहन ने जमीन से कई फीट ऊपर उठकर उड़ान भरी।
हालांकि, इसे फिलहाल ‘फ्लाइंग कार’ कहना जल्दबाजी होगी। यह एक सीट वाला इलेक्ट्रिक VTOL विमान है और इसे आम परिवहन के रूप में इस्तेमाल किए जाने से पहले व्यापक परीक्षण, सुरक्षा मानकों की पुष्टि और नियामकीय मंजूरियों की जरूरत होगी।
फिर भी, पहाड़ों की एक स्थानीय समस्या से निकला यह विचार अब सचमुच हवा में उड़ान भर चुका है।
