▪️देर से खाना और देर से सोना पड़ सकता है भारी, जानिए हमारी सेहत पर क्या होता है असर?
- मुंबई। बदलती जीवनशैली में देर रात खाना आज आम आदत बन गई है। ऑफिस से देर से लौटना, ट्रैफिक, काम का दबाव या रात में जागने की आदत के कारण कई लोग रात 9-10 बजे या उससे भी देर से डिनर करते हैं। लेकिन लगातार देर रात खाना शरीर की प्राकृतिक लय और पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, रात का भोजन और सोने के समय के बीच पर्याप्त अंतर रखना जरूरी है। खाने के तुरंत बाद बिस्तर पर जाने से पाचन संबंधी परेशानी, पेट फूलना और एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- शरीर की जैविक घड़ी भी है महत्वपूर्ण
हमारा शरीर एक प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम के अनुसार काम करता है। दिन के समय पाचन और मेटाबॉलिज्म अधिक सक्रिय रहते हैं, जबकि रात में शरीर धीरे-धीरे आराम और रिकवरी की स्थिति में जाने लगता है। ऐसे में देर रात भारी भोजन करने से शरीर को उसे पचाने में परेशानी हो सकती है। - कितने बजे खाना बेहतर?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, संभव हो तो रात का भोजन सोने से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले कर लेना चाहिए। कई लोगों के लिए शाम 7 से 8 बजे के बीच डिनर करना सुविधाजनक और बेहतर विकल्प हो सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति की दिनचर्या अलग होती है। इसलिए सबसे जरूरी है कि भोजन और नींद का समय नियमित रखा जाए।
अगर किसी कारण से देर रात खाना पड़े तो भोजन हल्का रखें। ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और अत्यधिक मीठा खाना रात में खाने से बचना बेहतर है। साथ ही भोजन के तुरंत बाद सोने के बजाय कुछ समय का अंतर जरूर रखें।
ध्यान रखें: कभी-कभार देर से खाना बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन इसे रोज की आदत बना लेना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। नियमित समय पर हल्का भोजन, पर्याप्त नींद और संतुलित दिनचर्या बेहतर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
