
▪️न्यूयार्क
एक समय भारत की सड़कों पर भटकने वाला एक देसी कुत्ता आज हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका में शांति और करुणा का संदेश दे रहा है। नाम है ‘आलोका’। भारतीय परिया नस्ल का यह कुत्ता बौद्ध भिक्षुओं के साथ ऐसी यात्रा पर निकल पड़ा, जिसने उसे दुनिया भर में पहचान दिला दी।
आलोका की कहानी भारत से शुरू हुई। 112 दिनों की शांति पदयात्रा के दौरान कुछ बौद्ध भिक्षुओं से उसकी मुलाकात हुई। इसके बाद वह लगातार उनके पीछे चलने लगा। भिक्षुओं ने शुरू में सोचा कि कुछ दूर साथ चलने के बाद वह लौट जाएगा, लेकिन आलोका ने उनका साथ नहीं छोड़ा। तेज धूप, बारिश और लंबी दूरी के बावजूद वह यात्रा में बना रहा।
इस दौरान वह एक कार की चपेट में आकर घायल भी हुआ और गंभीर रूप से बीमार पड़ा। भिक्षुओं ने आराम के लिए उसे वाहन में बैठाया, लेकिन कुछ समय बाद आलोका फिर उनके साथ चलने लगा। उसकी इसी जिद और लगाव ने उसे भिक्षुओं के लिए परिवार का हिस्सा बना दिया। ‘आलोका’ नाम का अर्थ प्रकाश या उजाला बताया जाता है।
बाद में भिक्षु अमेरिका पहुंचे और ‘वॉक फॉर पीस’ शुरू हुई। फोर्ट वर्थ, टेक्सास से वॉशिंगटन डीसी तक करीब 2,300 मील यानी लगभग 3,700 किलोमीटर की इस यात्रा में 19 बौद्ध भिक्षु शामिल थे। यात्रा का उद्देश्य शांति, करुणा, अहिंसा और मानव एकता का संदेश फैलाना था। आलोका भी इस यात्रा का हिस्सा बना और देखते ही देखते लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया।
आलोका की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उसने किसी आदेश या प्रशिक्षण के कारण नहीं, बल्कि अपने लगाव के कारण भिक्षुओं का साथ चुना। एक आवारा कुत्ते से ‘पीस डॉग’ तक का उसका सफर आज लोगों को यह संदेश देता है कि शांति और करुणा की भाषा इंसानों तक सीमित नहीं होती।
