
▪️मुंबई
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने की उम्मीद एक बार फिर बढ़ गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास या उससे नीचे जा सकती हैं। ऐसी स्थिति में भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बन सकती है।
हालांकि, कच्चे तेल की कीमत घटने का फायदा तुरंत पेट्रोल पंप पर मिलने लगे, यह जरूरी नहीं है। भारत में घरेलू ईंधन की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय क्रूड के भाव पर निर्भर नहीं करतीं। तेल कंपनियों की लागत, कर, विनिमय दर और पुराने नुकसान की भरपाई जैसे कई कारक भी खुदरा कीमतों को प्रभावित करते हैं। जुलाई में भी कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दामों में तत्काल कटौती नहीं हुई थी।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए क्रूड सस्ता होने पर देश के आयात बिल, महंगाई और अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। सरकार ने 2026 में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती भी की थी, हालांकि उस समय खुदरा पंप कीमतों में तत्काल बदलाव नहीं किया गया था।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। अगस्त में ब्रेंट क्रूड करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। ऐसे में 60 डॉलर तक की गिरावट अभी एक अनुमान है, निश्चितता नहीं।
यदि कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहती है, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की गुंजाइश बढ़ सकती है। फिलहाल वाहन चालकों को राहत के लिए तेल कंपनियों के अगले फैसले का इंतजार करना होगा।
