▪️सूर्यकांत उपाध्याय

एक बार एक व्यक्ति बहुत परेशान होकर जंगल में बैठा था। जीवन में लगातार मिल रही असफलताओं से वह इतना निराश था कि उसने आगे प्रयास करना ही छोड़ दिया था।
तभी उसकी नजर एक छोटी-सी चींटी पर पड़ी। चींटी अपने से कई गुना बड़ा दाना लेकर दीवार पर चढ़ने की कोशिश कर रही थी। वह बार-बार फिसलकर नीचे गिर जाती, लेकिन हर बार उठती और फिर प्रयास करती।
व्यक्ति ने गिनना शुरू किया। चींटी कई बार गिरी, लेकिन उसने प्रयास नहीं छोड़ा। आखिरकार वह दाना लेकर दीवार के ऊपर पहुंच गई।
यह देखकर व्यक्ति के भीतर एक नई ऊर्जा पैदा हुई। उसने सोचा, ‘जब इतनी छोटी-सी चींटी हार नहीं मानती, तो मैं क्यों मानूं?’
वह वापस लौटा और अपनी असफलताओं से सीख लेकर दोबारा प्रयास शुरू किया। इस बार उसने परिस्थितियों को दोष देने के बजाय अपनी गलतियों को सुधारा और अंततः सफल हुआ।
▪️सीख: असफलता यह नहीं बताती कि हम कमजोर हैं। वह केवल यह बताती है कि हमने पूरा प्रयास नहीं किया।
