
▪️मुंबई। जनवादी लेखक संघ, मुंबई और स्वर संगम फाउंडेशन की ओर से मीरा रोड स्थित विरंगुला केंद्र में प्रसिद्ध उर्दू कथाकार अली इमाम नकवी के चर्चित उपन्यास ‘तीन बत्ती के रामा’ के हिंदी संस्करण का विमोचन एवं चर्चा गोष्ठी आयोजित हुई। 1990 में प्रकाशित इस उपन्यास का हिंदी अनुवाद अनवर मिर्जा ने किया है और इसे रेखता समूह ने प्रकाशित किया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कथाकार धीरेन्द्र अस्थाना ने की। असग़र वजाहत, इक़बाल नियाज़ी और हृदयेश मयंक ने उपन्यास की विशेषताओं पर विचार रखे। असलम परवेज़ और वक़ार क़ादरी ने भी रचना-प्रक्रिया पर चर्चा की। अनवर मिर्ज़ा ने कहा कि उपन्यास के प्रभाव से प्रेरित होकर उन्होंने इसे हिंदी पाठकों तक पहुंचाने का निर्णय लिया। शैलेश सिंह ने अली इमाम नक़वी से जुड़ी स्मृतियां साझा कीं, जबकि सुबोध मोरे ने मुंबई के कामगार वर्ग पर केंद्रित मराठी साहित्य की चर्चा की।
कार्यक्रम में राकेश शर्मा, जेआर यादव, पुलक चक्रवर्ती, कल्पना महापुस्कर, राजेश विक्रांत, डॉ. रीता दास राम, राजीव रोहित, कबीर खान, सैयद ज़िया हैदर नक़वी, मिथिलेश प्रियदर्शी, फिरोज़ खान, संदीप माने, मुस्तहसन अज़्म, ज़ाकिर सरदार, समीर त्र्यंबक, शिरीष हाटे, कल्पना उबाले, कल्पना पांडे, बेबी नाज़, वसीम अकील शाह, संजय पांडे और दिनेश गुप्ता मौजूद रहे। संचालन डॉ. मुख्तार खान ने किया और आभार संजय भिसे ने माना।
