▪️सूर्यकांत उपाध्याय

मशहूर वाहन कंपनी फोर्ड के मालिक हेनरी फोर्ड को अपनी कार के लिए एक कुशल ड्राइवर की आवश्यकता थी। इसके लिए तीन ड्राइवरों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। हेनरी फोर्ड ने उनसे उनकी विशेषताओं के बारे में पूछा।
पहले व्यक्ति ने कहा, ‘मैं भीड़भाड़ वाली सड़क पर भी सौ मील प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चला सकता हूं।’
दूसरे ने गर्व से बताया, ‘मैं छह फुट गहरे गड्ढे को भी आसानी से पार कर सकता हूं।’
वहीं, तीसरे व्यक्ति ने कहा, ‘मैं सामान्यतः चालीस से साठ मील प्रति घंटे की रफ्तार से ही गाड़ी चलाता हूं, क्योंकि मैं अपनी और अपने मालिक की जान को खतरे में नहीं डालना चाहता।’
हेनरी फोर्ड ने बिना किसी संदेह के तीसरे व्यक्ति को ड्राइवर के रूप में चुन लिया। कारण साफ था, तेज गाड़ी चलाना या जोखिम उठाना किसी की विशेषता नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना ही असली समझदारी है।
जीवन में भी यही सिद्धांत लागू होता है। कई बार हम अपनी क्षमता दिखाने या दूसरों से आगे निकलने की होड़ में अनावश्यक जोखिम उठा लेते हैं। लेकिन सच्ची सफलता केवल अपनी क्षमता प्रदर्शित करने में नहीं, बल्कि सही समय पर संयम बरतने और अपनी जिम्मेदारी समझने में है।
- शिक्षा: जीवन के हर क्षेत्र में हमें अपने व्यवहार में संयम, विवेक और जिम्मेदारी रखनी चाहिए। यही गुण व्यक्ति को वास्तव में श्रेष्ठ बनाते हैं।
