- बॉम्बे हाई कोर्ट में आयोग की दलील, गोवा के एक परिवार के छह सदस्यों की याचिका पर फैसला सुरक्षित

▪️मुंबई
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान जारी प्रारूप सूची में किसी मतदाता का नाम दर्ज नहीं होने को उसका नाम हटाया जाना नहीं माना जा सकता। चुनाव आयोग ने बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ के समक्ष यह दलील देते हुए एसआईआर और नियमित मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया के बीच अंतर स्पष्ट किया। मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस और न्यायमूर्ति अमित जामसांडेकर की पीठ गोवा के सेंट क्रूज विधानसभा क्षेत्र के निवासी परेश सालगांवकर और उनके परिवार के पांच अन्य सदस्यों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान उनके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए।
- एसआईआर और सामान्य संशोधन में अंतर
चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने अदालत को बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण में मतदाता सूची नए सिरे से तैयार की जाती है। इसके विपरीत, विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) में पहले से मौजूद सूची में आवश्यक बदलाव और सुधार किए जाते हैं। ऐसे में एसआईआर की प्रारूप सूची में नाम का न होना तकनीकी रूप से नाम हटाए जाने के समान नहीं है।
- पता बदलने के आवेदन पर भी उठे सवाल
आयोग के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता पिछले आठ से दस वर्षों से उस पते पर नहीं रह रहे थे, जो पुरानी मतदाता सूची में दर्ज था। उन्होंने पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने से पहले पता बदलने के लिए आवेदन भी नहीं किया था।
वहीं, याचिकाकर्ता पक्ष ने प्रक्रिया के दौरान नाम शामिल कराने और पता बदलने के लिए किए गए प्रयासों का हवाला दिया। मामले की सुनवाई ऐसे समय हुई है, जब एसआईआर की प्रक्रिया और मतदाता सूची में नामों के समावेश को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब इस मामले में हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार है।
