▪️सूर्यकांत उपाध्याय

दो भाई थे। दोनों में बहुत प्रेम था। उनके खेत अलग-अलग थे, लेकिन एक-दूसरे के पास थे। बड़ा भाई शादीशुदा था, जबकि छोटा अभी अकेला था।
एक बार खेती बहुत अच्छी हुई और दोनों के खेतों में खूब अनाज पैदा हुआ। बड़ा भाई छोटे भाई से अपने खेत का ध्यान रखने को कहकर भोजन करने चला गया। उसके जाते ही छोटा भाई सोचने लगा, ‘मैं तो अकेला हूं। मेरे लिए यह अनाज जरूरत से ज्यादा है, जबकि भैया के साथ भाभी और बच्चे भी हैं। उन्हें अधिक अनाज की जरूरत होगी।’ यह सोचकर उसने अपने अनाज के ढेर से दस बोरे बड़े भाई के ढेर में डाल दिए।
कुछ देर बाद बड़ा भाई भोजन करके लौटा और छोटा भाई खाने चला गया। उसे देखकर बड़ा भाई सोचने लगा, ‘मेरी गृहस्थी तो अच्छी तरह चल रही है, लेकिन छोटे भाई को अभी अपना घर बसाना है और कई जिम्मेदारियां निभानी हैं। मुझे इतने अनाज की क्या जरूरत?’ यह सोचकर उसने भी अपने ढेर से दस बोरे छोटे भाई के ढेर में डाल दिए।
दोनों भाइयों के मन में एक-दूसरे के लिए प्रेम और अपनत्व था। अनाज की मात्रा पहले जितनी ही रही, लेकिन उनके रिश्ते की मिठास और बढ़ गई।
- शिक्षा: रिश्तों में जब दोनों ओर से देने की भावना होती है, तब प्रेम और विश्वास मजबूत होते हैं। जिस दिन स्वार्थ और केवल पाने की इच्छा हावी होने लगती है, उसी दिन रिश्तों में दूरियां बढ़ने लगती हैं।
