
▪️नई दिल्ली
दिल्ली का नाम कैसे पड़ा, इसका कोई एक सर्वमान्य ऐतिहासिक उत्तर नहीं है। इसके नाम की उत्पत्ति को लेकर कई मान्यताएँ और ऐतिहासिक कथाएँ प्रचलित हैं। दिल्ली का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है और इसका नाम अलग-अलग कालखंडों में अलग-अलग रूपों में मिलता है।
▪️दिल्ली नाम की उत्पत्ति की प्रमुख मान्यताएं
- राजा ढिल्लू के नाम पर: एक मान्यता के अनुसार, दिल्ली का नाम प्राचीन राजा ढिल्लू या दिल्लू के नाम पर पड़ा। हालांकि, इस राजा के शासनकाल और उससे संबंधित घटनाओं के ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
- ढिल्लिका से दिल्ली: ऐतिहासिक अभिलेखों में दिल्ली का प्राचीन नाम ‘ढिल्लिका’ मिलता है। वर्ष 1170 के बिजोलिया अभिलेख और 1276 के पालम बावड़ी अभिलेख में इस नाम के उल्लेख मिलते हैं। समय के साथ ढिल्लिका, ढिल्ली और दिल्ली जैसे नाम प्रचलित हुए।
- ‘ढीली कील’ की कहानी: एक प्रचलित लोककथा के अनुसार, राजा अनंगपाल तोमर ने महरौली में लौह स्तंभ स्थापित कराया था। मान्यता थी कि यह स्तंभ धरती में स्थित नागराज वासुकि के सिर पर टिका है। स्तंभ को निकालकर दोबारा गाड़ने के बाद वह पहले की तरह मजबूती से नहीं टिक पाया। इससे ‘ढीली’ शब्द और आगे चलकर ‘दिल्ली’ नाम प्रचलित होने की कहानी कही जाती है। हालांकि, इसे प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य नहीं माना जाता।
- देहली या दहलीज से दिल्ली: एक अन्य मत के अनुसार, इसका संबंध ‘देहली’ या ‘दहलीज’ शब्द से है, जिसका अर्थ चौखट या प्रवेश द्वार होता है। दिल्ली उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में प्रवेश का एक प्रमुख मार्ग रही है। हालांकि, इस व्युत्पत्ति पर भी सर्वसम्मति नहीं है।

ऐतिहासिक अभिलेखों में ‘ढिल्लिका’ नाम का उल्लेख प्रमाणित है, लेकिन दिल्ली नाम की मूल उत्पत्ति को लेकर निश्चित निष्कर्ष नहीं है। राजा ढिल्लू, ढीली कील और दहलीज से जुड़ी व्याख्याएं अलग-अलग मान्यताएं हैं।
