▪️सूर्यकांत उपाध्याय

बात उन दिनों की है, जब हमारी शादी को दो साल हो चुके थे। हम दोनों पति-पत्नी आपस में खूब लड़ते थे। वह मुझे उकसाती बहुत थी और मैं बात को खींचता बहुत था। हालांकि, हम एक-दूसरे से बेहद प्यार करते थे और एक-दूसरे का खूब खयाल भी रखते थे। इसी वजह से हमारी खूब बनती भी थी। लेकिन दिनभर हमारी नोकझोंक चलती रहती थी और हम एक-दूसरे की टांग खींचने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे।
लोगों को हमारे प्यार का पता नहीं था। उन्हें तो बस हमारे झगड़े दिखाई देते थे। लेकिन कहते हैं न कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते! आखिरकार हमारे प्यार की हकीकत भी सामने आ ही गई।
एक दिन सुबह मैं बहुत देर से उठा। मुझे ऑफिस जाना था, इसलिए जल्दी-जल्दी तैयार होने लगा। उधर, पत्नी डाइनिंग टेबल पर नाश्ता लगाकर मुझे खाने के लिए बुला रही थी। मैंने कहा, “आज बहुत देर हो गई है। नाश्ता नहीं कर पाऊंगा। दोपहर का लंच भी मत देना, आज खाने का समय नहीं मिलेगा।”
यह सुनते ही पत्नी झल्लाकर बोली, “आपकी तो रोज की यही आदत है। सुबह समय पर उठकर नाश्ता करते हैं, न आराम से ऑफिस जाते हैं। हमेशा हड़बड़ी रहती है। मैं रोज सुबह उठकर आपके लिए नाश्ता बनाती हूं, लंच तैयार करती हूं और नहाने-धोने के बाद आपके लिए खाना परोसती हूं।”
मेरी पत्नी की आदत थी कि मुझे खिलाने के बाद ही वह खुद खाती थी। तभी उसे सुकून मिलता था। लेकिन आज मेरे पास समय नहीं था, इसलिए मैंने साफ मना कर दिया।
वह बोली, “मैं कुछ नहीं सुनना चाहती। रोज-रोज एक ही बहाना! अब से न सुबह जल्दी उठूंगी और न ही आपके लिए कुछ करूंगी।”
यह सुनकर मैं भी झल्ला उठा। बोला, “कौन कहता है तुम्हें मेरे लिए सुबह उठने को? जाओ, आराम करो। अब से मेरे लिए कुछ मत करना। मेरी चिंता करने की जरूरत नहीं है। मैं ऑफिस जा रहा हूं। मेरे हिस्से का खाना भी तुम ही खा लेना!”
गुस्से में मैं ऑफिस के लिए निकल तो गया, लेकिन मन ही मन जानता था कि घर लौटने पर मेरी खैर नहीं। उधर, पत्नी भी नाराज थी, लेकिन उसे मेरी फिक्र मुझसे कहीं ज्यादा थी। उसकी नाराजगी की वजह यह नहीं थी कि मैंने नाश्ता नहीं किया, बल्कि यह थी कि उसकी मेहनत और प्यार को मैं हर बार अपनी जल्दबाजी में नजरअंदाज कर देता था।
उस दिन मुझे एहसास हुआ कि हमारी लड़ाइयों में नाराजगी से ज्यादा एक-दूसरे पर हक जताने का भाव था। वह मुझे समय पर खाना खिलाकर अपना प्यार जताती थी और मैं उसकी बातों का जवाब देकर उसे छेड़ता रहता था।
हमारी इस खटपट में गुस्सा भी था, रूठना भी था और मनाना भी। बस, प्यार जताने का हमारा अंदाज थोड़ा अलग था। शायद यही दाम्पत्य जीवन की खूबसूरती है, जहां छोटी-छोटी बातों पर तकरार होती है, लेकिन उसी तकरार के पीछे एक-दूसरे के लिए गहरी परवाह और बेशुमार प्यार छिपा होता है।
