- जानिए विशेष योग और गृहस्थों के लिए आवश्यक जानकारी

दीपावली का पर्व मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना का विशेष अवसर है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से लक्ष्मी-गणेश का पूजन करने से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। वर्ष 2026 में दीपावली रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल में वृषभ लग्न का विशेष महत्व है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन-वैभव का स्थायी निवास होता है।

- लक्ष्मी पूजन का प्रदोष काल मुहूर्त
8 नवंबर को लक्ष्मी पूजन का सबसे उपयुक्त समय शाम 6 बजकर 27 मिनट से रात 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इस दौरान वृषभ लग्न भी प्रभावी रहेगा। पूजन के लिए कुल दो घंटे का समय मिलेगा। प्रदोष काल शाम 6 बजकर 2 मिनट से रात 8 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है और दीपावली पर यह प्रदोष काल के साथ मेल खाता है। इसलिए गृहस्थों के लिए इस अवधि में लक्ष्मी पूजन करना विशेष फलदायी माना जाता है।

- अमावस्या तिथि का समय
दीपावली पर अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से प्रारंभ होगी और 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। लक्ष्मी पूजन के लिए अमावस्या तिथि, प्रदोष काल और स्थिर लग्न का संयोग महत्वपूर्ण माना जाता है।
- निशिथ काल में भी पूजन का विधान
दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के लिए निशिथ काल का भी उल्लेख मिलता है। 8 नवंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट से 9 नवंबर की रात 12 बजकर 48 मिनट तक निशिता काल रहेगा। इस अवधि में लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त 51 मिनट का है। इसके अतिरिक्त 9 नवंबर को रात 12 बजकर 53 मिनट से तड़के 3 बजकर 1 मिनट तक सिंह लग्न रहेगी।
हालांकि, निशिथ काल में पूजा का विशेष महत्व तांत्रिक साधना और विशिष्ट अनुष्ठान करने वाले साधकों के लिए माना जाता है। सामान्य गृहस्थों के लिए प्रदोष काल का मुहूर्त अधिक उपयुक्त है।
- चौघड़िया के बजाय स्थिर लग्न को दें प्राथमिकता
लक्ष्मी पूजन के लिए चौघड़िया मुहूर्त के बजाय प्रदोष काल में स्थिर लग्न को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है। चौघड़िया का उपयोग मुख्य रूप से यात्रा और अन्य सामान्य शुभ कार्यों के लिए किया जाता है। मान्यता है कि स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन और समृद्धि का स्थायी वास होता है। वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना गया है, इसलिए दीपावली के दिन इसका विशेष महत्व है।

- चोपड़ा पूजन की भी परंपरा
दीपावली पर कई समुदायों में विशेष रूप से गुजराती व्यापारी समाज में चोपड़ा पूजन की परंपरा है। इस अवसर पर मां लक्ष्मी की उपस्थिति में नई खाता-बही का शुभारंभ किया जाता है। व्यापारी नए वित्तीय वर्ष में कारोबार की उन्नति, आर्थिक समृद्धि और सफलता के लिए देवी लक्ष्मी से आशीर्वाद मांगते हैं। दीपावली पूजा को लक्ष्मी-गणेश पूजन के नाम से भी जाना जाता है।

- लक्ष्मी पूजन का मंत्र
लक्ष्मी पूजन के समय मां भगवती का ध्यान करते हुए श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए।
‘ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्म्यै नमः’
इस मंत्र का भावार्थ है कि परमात्मा स्वरूपा, माया और शक्ति की अधिष्ठात्री तथा धन-समृद्धि प्रदान करने वाली भगवती मां लक्ष्मी को बारंबार प्रणाम है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप और विधि-विधान से पूजा करने पर मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
आप श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र या महालक्ष्मी अष्टक जैसे स्तोत्रों का पाठ भी कर सकते हैं।
