■ सूर्यकांत उपाध्याय

सरकारी कार्यालय में लंबी लाइन लगी हुई थी। खिड़की पर जो क्लर्क बैठा था, वह तल्ख़ मिज़ाज का था और सभी से ऊँचे स्वर में बात कर रहा था।
उसी समय वह एक महिला को डाँटते हुए कह रहा था, “आपको जरा भी समझ नहीं है। यह फॉर्म भरकर लाई हैं और कुछ भी सही नहीं। सरकार ने फॉर्म मुफ़्त कर रखा है, तो कुछ भी भर दो। जेब का पैसा लगता तो दस लोगों से पूछकर भरतीं आप।”
पंक्ति में पीछे खड़ा एक व्यक्ति काफी देर से यह सब देख रहा था। वह पंक्ति से बाहर निकला और पीछे के रास्ते से क्लर्क के पास जाकर खड़ा हो गया। वहीं रखे मटके से उसने पानी का एक गिलास भरा और क्लर्क की ओर बढ़ा दिया।
क्लर्क ने उसकी ओर आँखें तरेरकर देखा और गर्दन उचकाकर ‘क्या है?’ का इशारा किया।
उस व्यक्ति ने शांति से कहा, “सर, आप काफी देर से बोल रहे हैं। गला सूख गया होगा, पानी पी लीजिए।”
क्लर्क ने गिलास हाथ में ले लिया और उसे ऐसे देखने लगा, जैसे किसी दूसरे ग्रह का प्राणी देख लिया हो।
फिर बोला, “जानते हो, मैं कड़वा सच बोलता हूँ, इसलिए सब नाराज रहते हैं। चपरासी तक मुझे पानी नहीं पिलाता।”
वह व्यक्ति मुस्कुरा दिया और चुपचाप पंक्ति में अपने स्थान पर जाकर खड़ा हो गया।
अब क्लर्क का मिजाज बदल चुका था। वह काफी शांत मन से सब से बात करने लगा और सभी को अच्छे ढंग से सेवाएँ देने लगा।
शाम को उस व्यक्ति के पास एक फ़ोन आया। दूसरी ओर वही क्लर्क था। उसने कहा, “भाईसाहब, आपका नंबर मैंने आपके फॉर्म से लिया था। धन्यवाद देने के लिए फोन किया है।
मेरी माँ और पत्नी में बिल्कुल नहीं बनती। आज भी जब मैं घर पहुँचा, तो दोनों बहस कर रही थीं, लेकिन आपका गुरुमंत्र काम आ गया।”
वह व्यक्ति चौंक गया और बोला,
“जी? गुरुमंत्र?”
क्लर्क ने कहा, “जी हाँ। मैंने एक गिलास पानी अपनी माँ को दिया और दूसरा अपनी पत्नी को देकर कहा, ‘गला सूख रहा होगा, पानी पी लो।’
बस, तब से हम तीनों हँसते-खेलते बातें कर रहे हैं।
अब भाईसाहब, आप आज हमारे घर खाने पर आइए।”
“जी! लेकिन खाने पर क्यों?”
क्लर्क ने भर्राए स्वर में उत्तर दिया,
“गुरु माना है तो इतनी दक्षिणा तो बनती है। और यह भी जानना चाहता हूँ कि एक गिलास पानी में इतना जादू है, तो खाने में कितना होगा!”
● शिक्षा: दूसरों के क्रोध को प्यार से ही दूर किया जा सकता है। कभी-कभी हमारे छोटे से, प्यार भरे व्यवहार से दूसरे इंसान में बहुत बड़ा परिवर्तन आ जाता है। यहीं से प्रेमपूर्ण रिश्तों की अचानक शुरुआत होती है, जिससे घर और कार्यस्थल दोनों जगह मन को सुकून मिलता है।
