■ 500 नए गतिशक्ति टर्मिनलों की तैयारी

● नई दिल्ली।
भारतीय रेलवे ने वर्ष 2026 को ‘सुधार वर्ष’ घोषित करते हुए यात्री सुविधाओं और माल ढुलाई दोनों मोर्चों पर व्यापक परिवर्तन की रूपरेखा लागू कर दी है। 52 हफ्तों में 52 सुधारों के लक्ष्य के साथ शुरू इस अभियान में ट्रेनों की साफ-सफाई से लेकर कार्गो टर्मिनलों के विस्तार तक ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
शनिवार को प्रेस वार्ता में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि अब एसी और स्लीपर कोचों की तरह जनरल डिब्बों में भी यात्रा के दौरान लगातार सफाई सुनिश्चित की जाएगी। अभी तक चलती ट्रेनों में मुख्य रूप से आरक्षित कोचों पर ध्यान दिया जाता था, जबकि जनरल डिब्बे अक्सर उपेक्षित रह जाते थे।
● पहले चरण में 80 लंबी दूरी की ट्रेनें
सुधार की शुरुआत विभिन्न जोनों की 80 लंबी दूरी की ट्रेनों से की जा रही है। छह माह के भीतर यह व्यवस्था सभी ट्रेनों में लागू करने का लक्ष्य है। नई प्रणाली के तहत ट्रेन के प्रारंभिक स्टेशन से अंतिम गंतव्य तक टॉयलेट, वाश-बेसिन, डस्टबिन और कोच के अंदर नियमित सफाई होगी। स्टेशन पर ठहराव के दौरान सफाई कर्मी आरक्षित कोचों के साथ-साथ जनरल डिब्बों में भी काम करेंगे।
● एआई से निगरानी, जवाबदेही तय
सफाई को औपचारिकता बनने से रोकने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। सेवा प्रदाता कंपनियों के लिए स्पष्ट मानक निर्धारित किए जाएंगे। सफाई के बाद कोचों की तस्वीरें कंट्रोल रूम में भेजी जाएंगी, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से गुणवत्ता की जांच होगी। मानकों पर खरा न उतरने पर दंडात्मक प्रावधान भी लागू होंगे।
साथ ही सफाई, लिनन वितरण और संग्रह जैसे कार्यों को अलग-अलग एजेंसियों के बजाय एकीकृत रूप से एक ही एजेंसी को सौंपा जाएगा, ताकि जवाबदेही स्पष्ट रहे।
यह कदम विशेषकर जनरल क्लास में यात्रा करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
● माल ढुलाई में भी बड़ा विस्तार
यात्री सुविधाओं के साथ रेलवे माल परिवहन क्षेत्र में भी संरचनात्मक बदलाव कर रहा है। अगले पांच वर्षों में 500 से अधिक गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल (जीसीटी) विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2022 में शुरू जीसीटी नीति के अंतर्गत अब तक 124 मल्टी-मॉडल टर्मिनल तैयार किए जा चुके हैं, जिनसे लगभग 20 हजार करोड़ रुपये वार्षिक राजस्व की संभावना बनी है।
