
● अलेक्जेंड्रिया
मिस्त्र के अलेक्जेंड्रिया तट के पास भूमध्यसागर की गहराइयों में सदियों से दबा इतिहास फिर सामने आ रहा है। गोताखोरों और भारी क्रेनों की मदद से प्राचीन Lighthouse of Alexandria, जिसे Pharos of Alexandria भी कहा जाता है, के विशाल पत्थरों को समुद्र की तलहटी से निकाला जा रहा है। यह वही ऐतिहासिक संरचना है, जिसकी गणना प्राचीन दुनिया के सात अजूबों में होती थी और जो कभी बंदरगाह के प्रवेश द्वार पर खड़ी थी।
साल 1995 में इसके अवशेषों की पहचान हुई थी। लगभग तीन दशक बाद अब फ्रांस के नेतृत्व वाले ‘PHAROS प्रोजेक्ट’ के तहत चुनिंदा स्थापत्य खंडों को विस्तृत अध्ययन के लिए बाहर लाया जा रहा है। उद्देश्य इन अवशेषों के आधार पर लाइटहाउस का सटीक डिजिटल पुनर्निर्माण करना है।
Dassault Systemes Foundation के तकनीकी सहयोग से अब तक 22 विशाल पत्थर निकाले जा चुके हैं, जिनमें कुछ का वजन 70–80 टन तक है। इनमें दरवाजों की चौखट, जांब्स, दहलीज और आधार पत्थर शामिल हैं। एक हेलेनिस्टिक शैली का अज्ञात पायलन भी मिला है, जो उस काल की भव्य स्थापत्य परंपरा को दर्शाता है।
हर पत्थर का फोटोग्रामेट्री तकनीक से 3D स्कैन किया जा रहा है। इन्हें पहले से डिजिटाइज़ किए गए 100 से अधिक ब्लॉकों के साथ जोड़कर ‘डिजिटल ट्विन’ तैयार किया जाएगा। इस प्रक्रिया में CNRS की इजिप्ट इकाई भी शामिल है।
यह परियोजना इतिहास और आधुनिक तकनीक के संगम का उदाहरण है, जो दुनिया को प्राचीन फारोस की भव्यता फिर से देखने का अवसर देगी।
