● सवा लाख हनुमान चालीसा पाठ हुआ
● श्री राम महायज्ञ की भव्य पूर्णाहुति हुई

● मुंबई
मालाड पूर्व स्थित श्री संकट मोचन विजय हनुमान टेकड़ी के दिव्य व विशाल हनुमान मंदिर परिसर में शनिवार को सवा लाख हनुमान चालीसा पाठ भव्यता से पूर्ण हुआ। इस अवसर पर 101 आचार्य पंडितों एवं विद्वान साधु संतों ने महाआरती में भाग लिया। इसी के साथ यहां श्री टीला द्वारा गाद्याचार्य यज्ञ सम्राट श्री महंत माधवाचार्यजी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित 54वें वार्षिक श्रीराम महायज्ञ की भव्य पूर्णाहुति हुई। इस नौ कुण्डीय सात दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान में वेदाचार्य ब्राम्हणों के मंत्रोच्चार के बीच संत-महात्माओं ने आहुतियां दीं, जिससे पूरा परिसर भक्तिरस और वेदध्वनि से गुंजायमान हो उठा।
हाईवे के समीप स्थित इस प्रतिष्ठित संत आश्रम में देश के विभिन्न तीर्थस्थलों से पधारे संत-महात्माओं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। यज्ञ सम्राट कहे जाने वाले श्री टीलाद्वारा गाद्याचार्य श्री महंत माधवाचार्यजी महाराज के सानिध्य में संपन्न इस नव कुंडात्मक श्रीराम महायज्ञ के यज्ञ कुंडों से उठती पवित्र अग्नि, वेद मंत्रों की गूंज और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित कर दिया। हजारों श्रद्धालु इस धार्मिक उत्सव के साक्षी बने जिन्होनें महाराजश्री से आशीर्वाद लिया और महाभंडारा प्रसाद ग्रहण किया।

यह परंपरा ब्रह्मलीन रामबालकाचार्यजी महाराज की प्रेरणा से प्रारंभ हुई थी, जो दशकों से निरंतर जारी है। श्री महंत माधवाचार्यजी ने बताया कि इस महायज्ञ से असंख्य बैरागी संत अखाड़ों और मठों के साधु-संत व अनेक सनातन धर्मावलंबी जुड़े हैं। अखंड ब्रह्मांड महानायक मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के चरणों में सभी मिलकर विश्व शांति और जनकल्याण की कामना करते हैं। मालाड पूर्व का यह संत आश्रम अनेक विशाल मंदिरों का रमणीय परिसर है। यहां दक्षिण मुखी खड़े हनुमान जी की विशाल प्रतिमा आकर्षण का केंद्र है। साथ ही राम जानकी मंदिर जगन्नाथ जी मंदिर शिव मंदिर शनि मंदिर के साथ ही अनेक देवी देवताओं की प्रतिमाएं पूजी जाती हैं। 100 से अधिक गायों वाली गौशाला भी यहां है। यहां यदाकदा मोर, बत्तख, खरगोश व अन्य पशु पक्षी भी दिख जाते हैं। तपोवन परिसर देश में में रामानंद संप्रदाय के बैरागी साधु-संतों का लोकप्रिय ठिकाना है। श्री महंत माधवाचार्यजी महाराज ने यहां की बागडोर संभालते हुए संत परंपरा की गरिमा को और भी बढ़ाया।
मालाड के इस विशाल आयोजन के दौरान संतों ने आगामी नासिक कुंभ को लेकर भी चर्चा की। श्री महंत माधवाचार्य महाराज ने महंतों एवं सेवकों को स्नान व्यवस्था, नियमित मंगलाचरण तथा अन्य व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करने के निर्देश दिए। समग्र रूप से यह महायज्ञ श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपरा का अद्भुत संगम बनकर उपस्थित हुआ, जिसने तपोवन को आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत कर दिया।
