
● विनीत त्रिपाठी@वाराणसी
श्रीब्रह्मराष्ट्र एकं विश्व महासंघ न्यास एवं श्री कुलपीठ परिवार के तत्वावधान में पावन आयोजन संपन्न हुआ। बाबा विश्वनाथ जी और माँ भगवती पराम्बा की कृपा से कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक गरिमा प्राप्त हुई। श्रीकुल पीठाधीश्वर 1008 डॉ. श्री सचिंद्रनाथ जी महाराज तथा श्रीमहंत आनंद भैरव जी (राकेश पांडेय) के पावन सान्निध्य में विशेष अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। पंडित श्री सीताराम पांडेय घाट (पुराना पीपापुल), सामने घाट, वाराणसी में नवनिर्मित श्री रामेश्वर मनोकामना मंदिर एवं श्रीरामेश्वर महादेव की प्राण-प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा ज्ञान महायज्ञ के षष्ठ दिवस का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया।
श्रीकुलपीठ के आचार्य प्रमोद त्रिवेदी जी महाराज ने गिरिराज महाराज की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जब देवराज इंद्र की पूजा के स्थान पर भगवान ने गोवर्धन की पूजा कराई, तब इंद्र अभिमानवश क्रोधित होकर पूरे व्रज को जलमग्न करने के लिए घनघोर वर्षा करने लगे। उस समय भगवान ने गिरिराज को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर धारण कर इंद्र के अभिमान का नाश किया और व्रजवासियों की रक्षा की। उन्होंने संदेश दिया कि जो भक्त मेरी भक्ति की छत्रछाया में आते हैं, उनका कोई भी बाल बाँका नहीं कर सकता, देवता भी नहीं।

महारास प्रसंग का वर्णन करते हुए आचार्य श्री ने गोपियों के अद्भुत, निष्काम और निष्कपट प्रेम की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि यदि भक्त का प्रेम गोपियों जैसा अलौकिक और समर्पित हो, तो स्वयं भगवान भी ऐसे प्रेम के ऋणी हो जाते हैं। कंस वध तथा भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर श्रीकुल पीठाधीश्वर डॉ. सचिंद्रनाथ जी महाराज ने भक्तों के साथ पुष्पों की होली खेली और पुष्पवर्षा कर भक्तों को आशीष प्रदान किया। कथा के उपरांत दिव्य भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
