
● नई दिल्ली
तेजी से विस्तार और समाज की बढ़ती अपेक्षाओं के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने कार्य ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा पकड़ी है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि संगठन अब विकेंद्रीकरण की नीति को अपनाकर स्वयंसेवकों को अधिक सशक्त बनाने की ओर अग्रसर है।
नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भागवत ने कहा कि आज की ‘जेन जी’ यानी नई पीढ़ी उन विचारों से जुड़ना चाहती है, जिनमें राष्ट्र सेवा की सशक्त भावना निहित हो। उन्होंने माना कि बदलते समय के साथ संघ को भी अपनी कार्यशैली में आधुनिक माध्यमों को अपनाना होगा, विशेष रूप से इंटरनेट मीडिया पर सक्रियता बढ़ाने की आवश्यकता है।
संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के संदर्भ में किए गए बदलावों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि संगठन का कार्यक्षेत्र अब व्यापक हो चुका है। ऐसे में केंद्रीकृत व्यवस्था की बजाय छोटी-छोटी इकाइयों के माध्यम से कार्य करना अधिक प्रभावी साबित होगा।
भागवत ने यह भी रेखांकित किया कि विकेंद्रीकरण से कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार आएगा। साथ ही, संगठन की मूल भावना मित्रता, अनुशासन और उदाहरण प्रस्तुत कर नेतृत्व करने की परंपरा अपरिवर्तित बनी रहेगी।
उन्होंने संकेत दिया कि जैसे-जैसे समाज की अपेक्षाएं बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी और उन्हें पहले से अधिक समर्पण और परिश्रम के साथ कार्य करना होगा।
