
● मुंबई।
हिंदू नववर्ष के पावन पर्व गुढी पाडवा ने इस वर्ष महाराष्ट्र को उत्साह, श्रद्धा और सांस्कृतिक रंगों से ओतप्रोत कर दिया। मुंबई, ठाणे और नागपुर समेत राज्यभर में निकली भव्य शोभायात्राओं ने जनजीवन में नई ऊर्जा का संचार किया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालु, ढोल-ताशों की गूंज और लहराते भगवा ध्वजों ने पूरे वातावरण को दिव्य और उत्सवमय बना दिया।

नागपुर में आयोजित प्रमुख शोभायात्रा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति विशेष आकर्षण रही। इस अवसर पर सामूहिक रामरक्षा पाठ का आयोजन हुआ। उन्होंने गुढी पाडवा को भारतीय संस्कृति का प्रतीक बताते हुए समाज को नववर्ष में नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया और राष्ट्र निर्माण में सामूहिक सहभागिता पर बल दिया।

ठाणे में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कौपीनेश्वर मंदिर से प्रारंभ हुई शोभायात्रा में शामिल हुए। हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी और लेझीम-ढोल की लयबद्ध ध्वनि ने पूरे शहर को भक्ति और उल्लास के रंग में रंग दिया।
डोंबिवली में गुढी पाडवा ने परंपरा और आधुनिकता का आकर्षक समन्वय प्रस्तुत किया। महिला राइडर्स और साइकिल सवारों ने पारंपरिक परिधान में गुढी सजाकर उत्सव मनाया। युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इस वर्ष के आयोजन की विशेष पहचान बनी।
इसके साथ ही तुलजा भवानी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। प्रातःकालीन आरती के साथ मंदिर शिखर पर गुढी स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई।
समग्र रूप से गुढी पाडवा का यह उल्लास महाराष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक एकजुटता और परंपराओं की जीवंतता का प्रभावशाली प्रतिबिंब बनकर उभरा, जिसने एक बार फिर इस भूमि को ‘उत्सवों की धरती’ होने का गौरव प्रदान किया।
