■ आत्मन मिश्र

भारतीय संगीत जगत की अमर आवाज आशा भोसले अब खामोश हो गई। रविवार, 12 अप्रैल 2026 की सुबह उनके निधन की खबर ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया। दिल का दौरा पड़ने के बाद 11 अप्रैल की रात उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने हरसंभव प्रयास किए, परंतु एक-एक कर अंगों के काम करना बंद करने से उनकी जीवन यात्रा समाप्त हो गई। उनके जाने के साथ मंगेशकर परिवार का एक और चमकता सितारा सदा के लिए ओझल हो गया।
मुंबई में उनके निवास पर सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक अंतिम दर्शन की व्यवस्था की गई, जहां हजारों प्रशंसकों और गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। आज 13 अप्रैल को शिवाजी पार्क स्थित श्मशान भूमि में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस दौरान राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र की अनेक हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई शीर्ष नेताओं ने उन्हें याद करते हुए भारतीय संगीत की अपूरणीय क्षति बताया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी आशा भोसले के निधन पर संवेदना प्रकट की। उद्धव ठाकरे ने कहा कि आशा ताई की आवाज ने पीढ़ियों को आनंद दिया और उनके जाने से संगीत का एक मजबूत स्तंभ ढह गया। उनके अनुसार, “उनका गाया हर गीत ही उनका अमरत्व है।”
वहीं शरद पवार ने इसे संगीत के स्वर्ण युग का अंत बताया। उन्होंने कहा कि आशा ताई की आवाज की खनक, चपलता और भावनात्मक गहराई उन्हें अद्वितीय बनाती थी। छह दशकों से अधिक समय तक उन्होंने हिंदी, मराठी, बंगाली सहित कई भाषाओं में हजारों गीत गाकर संगीत प्रेमियों के दिलों में अटूट स्थान बनाया।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उनके निधन को देश के लिए गहरा आघात बताया, वहीं छगन भुजबल ने उनके बहुआयामी संगीत सफर और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान को याद किया। रोहित पवार ने कहा कि उनकी जादुई आवाज ने पीढ़ियों को सम्मोहित किया और उनका प्रभाव हमेशा बना रहेगा।
आशा भोसले ने अपने लंबे करियर में पॉप, भजन, शास्त्रीय और फिल्मी संगीत के हर रंग को अपने सुरों से सजाया। पद्म विभूषण, दादासाहेब फालके जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत इस महान गायिका की आवाज भले ही थम गई हो, लेकिन उनके गीत सदैव गूंजते रहेंगे।
संगीत की दुनिया में उनका स्थान अडिग रहेगा, एक ऐसी विरासत के रूप में, जो समय की सीमाओं से परे है।
