
● नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को अस्थिर कर दिया है और मंदी की आशंका गहराने लगी है। तेल की कीमतों में उछाल और महंगाई के दबाव के बीच जहां कई देश संघर्ष कर रहे हैं, वहीं भारत अपनी मजबूत नीतियों और घरेलू मांग के दम पर विकास की राह पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
इस परिदृश्य ने इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) को भी सतर्क कर दिया है। आईएमएफ की प्रमुख क्रिस्टलीना जोर्जिएवा ने चेतावनी दी है कि युद्ध के कारण बढ़ती महंगाई वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भू-राजनीतिक तनाव का असर सीधे आर्थिक स्थिरता पर पड़ रहा है।
हालांकि इस चुनौतीपूर्ण माहौल में भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। आईएमएफ ने भारत की आर्थिक नीतियों और मजबूत बुनियादी ढांचे की सराहना करते हुए कहा कि देश की विकास दर वैश्विक औसत से दोगुनी से अधिक है। वित्त वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है, जो वैश्विक औसत 3.1 प्रतिशत से कहीं अधिक है।
आईएमएफ ने भारत के विकास दर के अनुमान में 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी की है। यह तब है जब वैश्विक स्तर पर विकास दर को घटाया गया है और मंदी की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की संतुलित आर्थिक नीतियां और मजबूत घरेलू मांग उसे वैश्विक अस्थिरता के बीच भी आगे बढ़ने में मदद कर रही हैं।
कुल मिलाकर, जहां एक ओर मिडिल ईस्ट का संकट दुनिया के लिए आर्थिक चुनौती बन रहा है, वहीं भारत इस दौर में भी विकास की रफ्तार बनाए रखने में सफल नजर आ रहा है।
