
● नई दिल्ली
विदेशों में पनाह लेकर भारत में अपराध की जड़ें मजबूत करने वाले माफिया, ड्रग तस्करों और संगठित गैंगस्टरों के खिलाफ अब सख्त और सुनियोजित कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। केंद्रीय एजेंसियों ने ‘ऑपरेशन ग्लोबल हंट’ के नाम से एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय अभियान छेड़ा है, जिसके तहत करीब 100 भगोड़े अपराधियों को पकड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस मिशन में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जैसी प्रमुख एजेंसियां, इंटरपोल के साथ समन्वित रूप से काम कर रही हैं। यह संयुक्त प्रयास वैश्विक स्तर पर अपराधियों की पहचान, निगरानी और गिरफ्तारी को गति देने में अहम साबित होगा।
सूत्रों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट से जुड़े आरोपियों की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए इंटरपोल के ‘सिल्वर नोटिस’ का उपयोग किया जा रहा है। एजेंसियां अब केवल लंबी प्रत्यर्पण प्रक्रिया तक सीमित रहने के बजाय, जरूरत पड़ने पर विशेष विमानों के माध्यम से आरोपियों को सीधे भारत लाने की रणनीति पर भी काम कर रही हैं।
इस अभियान का मुख्य फोकस अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क, साइबर अपराध, आर्थिक अपराध और संगठित गैंग्स पर है। एजेंसियों का मानना है कि कई अपराधी विदेशों में बैठकर भारत में अवैध गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं, जिससे देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों पर असर पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस ऑपरेशन की रूपरेखा इंटरपोल सदस्य देशों की हालिया बैठक में तैयार की गई थी। स्पष्ट उद्देश्य है, विदेशों में छिपे अपराधियों की पहचान, उनकी गिरफ्तारी और उन्हें भारत लाकर कानून के कटघरे में खड़ा करना।
