
● मुंबई
महंगाई से राहत की उम्मीद कर रहे आम उपभोक्ताओं के लिए आने वाले महीनों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। साबुन, शैंपू, बिस्किट, पैकेट फूड, खाद्य तेल समेत रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुओं के दाम बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। बढ़ती लागत और कच्चे माल की महंगाई के चलते देश की बड़ी एफएमसीजी कंपनियां कीमतों में इजाफे की तैयारी में हैं।
प्रमुख एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया ने संकेत दिए हैं कि अगले कुछ महीनों में उत्पादों की कीमतों में फिर वृद्धि की जा सकती है। कंपनी का कहना है कि पैकेजिंग सामग्री, परिवहन और अन्य जरूरी इनपुट लागत लगातार बढ़ रही हैं। डाबर चालू तिमाही में ही अपने कई उत्पादों के दाम करीब 4 प्रतिशत तक बढ़ा चुका है।
विशेषज्ञों के मुताबिक एफएमसीजी उद्योग इस समय लागत बढ़ने के दोहरे दबाव का सामना कर रहा है। खाद्य तेल, डेयरी उत्पाद, प्लास्टिक पैकेजिंग और अन्य कच्चे माल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। इसके साथ ही परिवहन खर्च बढ़ने से कंपनियों की उत्पादन और वितरण लागत भी बढ़ गई है।
जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव भी महंगाई को हवा दे रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण वैश्विक कच्चे तेल बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है। यदि कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक ऊंचे बने रहते हैं, तो पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं। इसका असर परिवहन, फैक्ट्री संचालन और पैकेजिंग लागत पर पड़ेगा, जिसका अंतिम बोझ आम उपभोक्ताओं की जेब पर ही आएगा।
