
● मुंबई
डिजिटल दौर में अब लोग स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का रुख कर रहे हैं। हाल ही में सामने आई एक स्टडी के अनुसार, हर चार में से एक व्यक्ति हेल्थ से जुड़े सवालों के जवाब पाने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है। विशेषज्ञों का दावा है कि स्वास्थ्य के मामले में AI के भरोसे न रहकर डॉक्टरों से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
रिपोर्ट के मुताबिक, लोग सामान्य बीमारियों के लक्षण समझने, डाइट प्लान जानने, दवाइयों की जानकारी लेने और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सवालों के समाधान के लिए AI प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर हो रहे हैं। खासतौर पर युवाओं में यह चलन तेजी से बढ़ा है, क्योंकि उन्हें तुरंत और आसान भाषा में जानकारी मिल जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI लोगों को शुरुआती स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता देने में मददगार साबित हो रहा है। हालांकि, डॉक्टरों ने यह भी सलाह दी है कि गंभीर बीमारी या उपचार से जुड़े मामलों में केवल AI पर निर्भर रहने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय लेना जरूरी है।
तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच AI अब केवल कामकाज या शिक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हेल्थ सेक्टर में भी लोगों का भरोसेमंद डिजिटल सहायक बनता जा रहा है।
आसान भाषा, तुरंत जवाब और 24 घंटे उपलब्ध रहने जैसी खूबियों ने AI को लोगों के बीच लोकप्रिय बना दिया है। कई लोग डॉक्टर के पास जाने से पहले अपनी समस्याओं को समझने के लिए AI की मदद ले रहे हैं। खासकर युवा पीढ़ी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़े लोग इस तकनीक पर अधिक भरोसा दिखा रहे हैं।
हालांकि, स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय में सही और गलत जानकारी के बीच फर्क समझना बेहद अहम माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI सामान्य जानकारी देने में मददगार हो सकता है, लेकिन यह डॉक्टरों की सलाह का विकल्प नहीं बन सकता। कई बार अधूरी या गलत जानकारी लोगों को भ्रमित भी कर सकती है।
ऐसे में जरूरी है कि AI को केवल शुरुआती जानकारी और जागरूकता के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाए, जबकि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय को प्राथमिकता दी जाए।
