
● मुंबई
दुनियाभर में शिक्षा व्यवस्था का ढांचा अलग-अलग है, लेकिन कुछ देशों के स्कूल अपने अनोखे नियमों और बच्चों की जीवनशैली पर खास ध्यान देने के कारण चर्चा में रहते हैं। खासतौर पर एशियाई देशों में शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं मानी जाती, बल्कि बच्चों को अनुशासन, आत्मनिर्भरता और मानसिक संतुलन भी सिखाया जाता है। इसी सोच के तहत कई देशों के स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के बीच आराम और ‘पावर नैप’ यानी थोड़ी देर सोने का समय भी दिया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी देर की नींद बच्चों के दिमाग को तरोताजा करती है, जिससे उनकी एकाग्रता और सीखने की क्षमता बेहतर होती है। यही वजह है कि जापान और चीन जैसे देशों में यह व्यवस्था लंबे समय से अपनाई जा रही है।
जापान में नींद को स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां कई स्कूलों, कॉलेजों और दफ्तरों में भी थोड़ी देर आराम करने की परंपरा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापानी स्कूलों में लंच के बाद बच्चों को 20 से 40 मिनट तक आराम करने का समय दिया जाता है। इससे बच्चे दोबारा पढ़ाई में बेहतर ढंग से ध्यान लगा पाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि कुछ स्थानों पर यदि कोई बच्चा क्लास में झपकी लेता दिखाई दे, तो उसे तुरंत नहीं जगाया जाता। इसे इस बात का संकेत माना जाता है कि बच्चा मेहनत कर रहा है और उसे आराम की आवश्यकता है।
चीन के कई स्कूलों में भी बच्चों को लंच के बाद आराम करने की सुविधा दी जाती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया है कि बच्चों की डेस्क को अस्थायी बेड की तरह इस्तेमाल किया जाता है। कई स्कूलों में बच्चों को तकिया और चादर तक उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वे थोड़ी देर आराम कर सकें।
