
● मुंबई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईंधन बचत के आह्वान के बाद महाराष्ट्र सरकार और सत्तारूढ़ भाजपा ने मितव्ययिता अभियान को गंभीरता से लागू करना शुरू कर दिया है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच राज्य सरकार अब प्रशासनिक खर्च और ईंधन खपत कम करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में मंत्रियों के काफिलों को सीमित करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही नेताओं और जनप्रतिनिधियों को निजी वाहनों के बजाय मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि आम नागरिकों के बीच जिम्मेदार व्यवहार का संदेश भी जाएगा।
सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा बदलाव करते हुए मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि छोटे-छोटे कार्यों के लिए जिला कलेक्टरों और अधिकारियों को मुंबई तलब न किया जाए। अधिकांश बैठकों को अब ऑनलाइन माध्यम से आयोजित करने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे अनावश्यक यात्राओं और सरकारी खर्च में कमी लाई जा सके।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि प्रधानमंत्री का संदेश केवल जनता के लिए नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासन के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के जरिए सरकारी कामकाज को अधिक प्रभावी और किफायती बनाया जा सकता है।
महाराष्ट्र सरकार की यह पहल प्रशासनिक सादगी, संसाधनों के बेहतर उपयोग और जिम्मेदार शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब इस बात पर नजर रहेगी कि यह अभियान व्यवहारिक स्तर पर कितना असर दिखाता है और क्या दूसरे राज्य भी इसी मॉडल को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
