■ आस्था और संस्कृति की झलक से सजा बोधचिह्न

● मुंबई
नासिक-त्र्यंबकेश्वर में वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों ने अब रफ्तार पकड़ ली है। इसी कड़ी में कुंभ मेले के आधिकारिक बोधचिह्न (लोगो) का भव्य अनावरण किया गया। सह्याद्रि अतिथि गृह में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजीत पवार सहित कई गणमान्य हस्तियों ने लोगो का लोकार्पण किया।
इस विशेष लोगो के चयन के लिए देशव्यापी डिजाइन प्रतियोगिता आयोजित की गई थी, जिसमें 3 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियां भेजीं। पुणे के सुमित काटे ने प्रथम स्थान हासिल करते हुए 3 लाख रुपए का पुरस्कार अपने नाम किया। वहीं, नोएडा के मयंक नायक दूसरे और पंढरपुर के पीयूष पिंपलनेरकर तीसरे स्थान पर रहे।
प्रतियोगिता की प्रविष्टियों का मूल्यांकन प्रतिष्ठित डिजाइन विशेषज्ञों की समिति ने किया। इस समिति में प्रसिद्ध गीतकार एवं विज्ञापन विशेषज्ञ प्रसून जोशी तथा डिज़ाइन विशेषज्ञ अश्विनी देशपांडे जैसे नाम शामिल थे। चयन प्रक्रिया में रचनात्मकता, नवाचार, प्रस्तुति और सांस्कृतिक पहचान को प्रमुख आधार बनाया गया।

लोगो में नासिक और त्र्यंबकेश्वर की आध्यात्मिक विरासत को प्रतीकात्मक रूप से उकेरा गया है। भगवान शिव का त्रिशूल आध्यात्मिक शक्ति और सनातन परंपरा का प्रतीक है, जबकि त्र्यंबकेश्वर मंदिर क्षेत्र की धार्मिक पहचान को दर्शाता है। इसके साथ ही कालाराम मंदिर की आकृति और गोदावरी नदी को शिवलिंग के स्वरूप में प्रस्तुत कर कुंभ मेले की पवित्र स्नान परंपरा को विशेष महत्व दिया गया है।
कार्यक्रम में कई मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत बड़ी संख्या में मौजूद रहे। माना जा रहा है कि यह नया लोगो सिंहस्थ कुंभ 2027 की वैश्विक पहचान को और अधिक प्रभावशाली बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
