
एक पत्नी ने अपने पति से आग्रह किया कि वह उसकी ऐसी छह कमियाँ बताए, जिन्हें सुधारकर वह एक बेहतर पत्नी बन सके।
पत्नी की बात सुनकर पति कुछ क्षणों के लिए असमंजस में पड़ गया। उसने मन ही मन सोचा-
“मैं तो बड़ी आसानी से उसकी छह कमियों की सूची बना सकता हूँ… और शायद वह भी मेरी साठ कमियाँ गिना सकती है।”
लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। थोड़ी देर सोचकर वह मुस्कुराया और बोला-
“मुझे इस बारे में सोचने के लिए थोड़ा समय दो। मैं तुम्हें कल सुबह जवाब दूँगा।”
अगली सुबह पति जल्दी ऑफिस चला गया। वहाँ पहुँचकर उसने एक फूलवाले को फोन किया और अपनी पत्नी के लिए छह सुंदर गुलाब भिजवाने को कहा।
साथ में उसने एक छोटा-सा संदेश भी लिखवाया-
“मुझे तुम्हारी ऐसी कोई छह कमियाँ नहीं मालूम, जिनमें सुधार की जरूरत हो। तुम जैसी भी हो, मुझे बहुत अच्छी लगती हो।”
शाम को जब पति घर लौटा, तो उसने देखा कि उसकी पत्नी दरवाज़े पर खड़ी उसका इंतज़ार कर रही थी।
उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन वे शिकायत के नहीं, प्रेम और अपनत्व के आँसू थे।
उस दिन उनके रिश्ते की मिठास पहले से कहीं अधिक बढ़ गई।
पति भी मन ही मन खुश था कि उसने आलोचना के बजाय प्रेम और सराहना को चुना।
● सीख : रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए कमियां गिनाना नहीं, गुणों को पहचानना जरूरी है।
